पर्वतीय क्षेत्र में पुष्प उत्पादन (फ्लोरीकल्चर) की अपार संभावनाएं हैं। यदि मेहनत की जाए तो स्वरोजगार के लिए यह उचित माध्यम बन सकता है।
यह कहना है कि मालरोड निवासी 90 वर्षीय पुष्प प्रेमी परसी लाल शाह का। श्री शाह ने अपने मालरोड स्थित बंगले में गमलों का फूल का बगीचा तैयार किया है, जिसमें विगोनिया सहित फूलों की तमाम प्रजातियां हैं।
विगोनिया फूल की तकरीबन 50 प्रजातियां उनके पास हैं। बगिया की देखरेख वह स्वयं करते हैं। फूलों के प्रति प्रेम को ही वह अपनी लंबी आयु का कारण बताते हैं।
मालरोड स्थित औसमान थौर्प बंगला निवासी 90 वर्षीय परसी लाल शाह की दिनचर्या फूलों की देखरेख से शुरू होती है।
उद्यान विभाग में गार्डन इंचार्ज पद पर रहते भी उन्होंने घर पर फूलों की बगिया बनाई थी, लेकिन 40 साल पहले सेवानिवृत्त होने के बाद पूरा समय फूलों की बगिया को दे दिया।
बंगले में उन्होंने गमलों की बगिया बनाई है, जिसमें विगोनिया, लिली, गुलाब, गुलदावरी, डहेलिया फूल हैं, लेकिन सबसे अधिक 50 प्रजातियां उनके पास विगोनिया फूल की हैं।
इस प्रजाति के 20 से 25 रंग हैं। वह फूलों को बेचते नहीं हैं, वरन फूलों के प्रति प्रेम रखने वालों की मदद करते हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में लोगों का फूलों के प्रति रुझान कम हो रहा है, लोग मेहनत करना नहीं चाहते।
उम्र के इस पड़ाव में उन्हें अब कानों से कम सुनाई देता है, लेकिन फूलों के बारे में जानकारी इतनी कि, एक बार शुरू हुए तो रुकने का नाम नहीं लेते। कीटनाशक आदि के लिए उन्हें उद्यान विभाग से मदद मिल जाती है।