विकास भवन में अधिकारियों की बैठक लेते डीएम।
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नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल के मुख्य स्रोत नौले और धारों की अब दशा सुधरेगी। पूर्व में 41 नौलों का सर्वेक्षण कर उनकी जीआईएस मैपिंग के बाद अब जिला प्रशासन ने कम पानी और सूख चुके नौले-धारों की स्राव क्षमता बढ़ाने के लिए प्रारंभिक चरण में जिले के सात नौलों का जीर्णोद्धार कार्य करने का निर्णय लिया है। डीएम सविन बंसल ने टीम गठित करके 24 अक्तूबर तक इन नौलों का निरीक्षण करने और उसके बाद कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
विकास भवन में आयोजित बैठक में डीएम ने बताया कि नगर क्षेत्र में स्थित नौलों का सर्वेक्षण करने के बाद प्रारंभिक चरण में सात नौलों का जीर्णोद्धार करने के लिए आगणन तैयार कर लिया गया है। जिसमें बल्ढौटी का चिमसीम नौला, पातालदेवी धारा, रामदैही धारा, तुलारामेश्वर नौला, कपीना धारा, राजनौली और धारानौला में प्रारंभिक चरण में काम किया जाएगा। उन्होंने इसके लिए वीपीकेएस के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में अधीक्षण अभियंता जल संस्थान, वैज्ञानिक डॉ. जेके बिष्ट, डॉ. डीके मिश्रा और पालिका के अधीशासी अधिकारी की संयुक्त टीम गठित कर उनसे 24 अक्तूबर को इन नौलों, धारों का निरीक्षण करने और उसकी रिपोर्ट तैयार करने को कहा है।
उन्होंने बताया कि इसके बाद प्राथमिकता से नौलों और धारों के जीर्णोद्धार का काम शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में इन नौलों में मरम्मत और रख रखाव का काम किया जाएगा और उसके बाद वहां पर सुंदरीकरण और पौधरोपण का काम भी होगा। वीपीकेएस के निदेशक डॉ. अरुणव पटनायक ने बताया कि वह स्वयं जाकर नौलों का निरीक्षण करेंगे और आवश्यक व्यवस्थाएं देखेंगे। अधीक्षण अभियंता जल संस्थान डीके मिश्रा, वैज्ञानिक डॉ. जेके बिष्ट ने भी सुझाव रखे। सीडीओ जेएस नगन्याल ने नौलों के आसपास गंदे पानी का रिसाव होने वाली जगहों और टूट चुकी नालियों का भी ध्यान रखने को कहा। डीएम ने पिरूल से कोयला बनाने और उसके लिए चूल्हे का निर्माण आदि पर भी वीपीकेएस के वैज्ञानिकों से चर्चा की और परियोजना निदेशक डीआरडीए डीडी पंत और डीडीओ मो. असलम को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता नंद किशोर, पालिका के अधिशासी अधिकारी एके वर्मा आदि मौजूद रहे।