पर्यटन नगरी का प्रख्यात गोल्फ मैदान सैलानियों के मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा है। लेकिन, पर्यटकों के लिए यहां शौचालय तक की सुविधा नहीं है, जिस कारण पर्यटकों को परेशानी होती है। यह मैदान एशिया का दूसरा सबसे बड़ा नैसर्गिक गोल्फ मैदान है। प्राकृतिक सौंदर्यता के चलते ही सिने निर्माता निर्देशक यहां कई फिल्मों की यहां शूटिंग कर चुके हैं। देश विदेश के पर्यटक इस मैदान के दीदार को खिंचे चले आते हैं। गोल्फ मैदान क्षेत्र के पर्यटन व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। यह मैदान वर्तमान में सेना की देखरेख में है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि सुविधाएं उपलब्ध हों तो यह क्षेत्र पर्यटन हब के रूप में विकसित हो सकता है।
प्राकृतिक सौंदर्यता से भरपूर रानीखेत में अंग्रेजों ने 1869 में जब यहां छावनी बसाई, तभी से यह क्षेत्र पर्यटन नगरी के रूप में विख्यात हो गया। कालिका के पास गोल्फ मैदान नैसर्गिक है। रानीखेत आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक गोल्फ मैदान का दीदार करना नहीं भूलते। वर्तमान में यह मैदान सेना की सुरक्षा में है। मैदान के आसपास शौचालय नहीं है, जिस कारण पर्यटकों को परेशानी होती है। हालांकि स्थानीय नागरिकों की यह मांग वर्षों पुरानी है। व्यवसायी हिमांशु उपाध्याय का कहना है कि गोल्फ मैदान रानीखेत का सिरमौर है। इस मैदान का अत्यधिक प्रचार-प्रसार किया जाना जरूरी है। व्यवसायी मुकेश फर्त्याल का कहना है कि गोल्फ मैदान सेना के पास है, इसीलिए इसकी खूबसूरती बनी हुई है।
देश-विदेश के सैलानी यहां आकर घंटों मैदान के घूमते हैं और फोटो खिंचवाते हैं। गोल्फ के शौकीन इस मैदान की नैसर्गिक सुंदरता के कायल रहते हैं। यदि मैदान के आसपास शौचालय, पेयजल आदि की सुविधाएं हों तो पर्यटकों की आमद बढ़ सकती है। व्यापार मंडल के प्रदेश संगठन मंत्री मनोज अग्रवाल का कहना है कि गोल्फ मैदान और चौबटिया के सेब गार्डन ही पर्यटन व्यवसाय का मुख्य जरिया हैं। इस मैदान को दलमोठी के जंगल से मिला देना चाहिए। जंगल में सफारी और अभ्यारण्य पर्यटकों को लुभाएंगे। साथ ही इसका एक सिरा चौबटिया के प्रख्यात सेब के बगीचे से भी मिलता है। गोल्फ मैदान के संरक्षण की जरूरत है। आसपास शौचालय नहीं होने से पर्यटकों को परेशानी होती है। इसके लिए पर्यटन विभाग की तरफ से भी प्रयास होने चाहिए।