कुमाऊं विश्वविद्यालय के एसएसजे परिसर अल्मोड़ा के ऑडिटोरियम में चल रहे तीन दिनी सांस्कृतिक समारोह ‘उल्लास’ में दूसरे दिन विभिन्न संकायों के छात्र-छात्र-छात्राओं ने प्रहसन, लोकनृत्य प्रस्तुत कर लोक संस्कृति के विविध रंग बिखेरे। विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों ने ओ दीदी ओ भुलि बिंसरका धुरा आओ घास काटना.. गीत पर घस्यारी नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। इसके अलावा उन्होंने कुमाऊंनी बारात, घाघरे, भिटोली आदि पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
विधि संकाय के छात्र-छात्राओं ने नृत्य नाटिका रमौल की प्रस्तुति दी। इसके अलावा प्रहसन के माध्यम से समाज में बढ़ रहे शराब के प्रचलन पर कटाक्ष किया। विज्ञान संकाय ने मोबाइल के सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष पर प्रहसन प्रस्तुत किया। कला संकाय ने लोकनृत्य, चांचरी, छपेली और लाली ओ लाली हौंसिया पधानी लाली तिले धारो बोला... झोड़ा प्रस्तुत कर वाहवाही बटोरी। दृश्य कला संकाय ने शिव तांडव का शानदार मंचन किया। परिसर की अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. दया पंत ने कहा कि युवाओं को अपनी लोक संस्कृति को बचाने के लिए आगे आना होगा। मुख्य सांस्कृतिक संयोजक भावना पांडे ने कहा कि हमारी संस्कृति हमारी विरासत है। लोक नृत्य और प्रहसन के निर्णायक मंडल में प्रकाश बिष्ट, गोकुल बिष्ट, रमेश लाल, त्रिभुवन गिरी महाराज, भास्कर साह, नवीन कांडपाल थे।
संचालन प्रो. भीमा मनराल, डा. देवेंद्र बिष्ट, डा. संजीव आर्या ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. इला साह, डा. कुसुमलता, डा. पुष्पा वर्मा, डा. दया उप्रेती, प्रो. मीना पथनी, डा. रेनू प्रकाश, प्रो. एमएस जिन्नाह, प्रो. केएन पांडे, प्रो. एचबी कोठारी, डा. शालिमा तबस्सुम, डा. सबीहा नाज, डा. रुबीना अमान, प्रो. मो. मुफरान, अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रभारी मनीष तिवारी, प्रो. जया उप्रेती, डा. एचआर कौशल, डा. बीसी तिवारी, ललित जोशी, प्रो. निर्मला पंत, प्रो. केसी जोशी, प्रो.एसए हामिद, प्रो. जीसी साह, लियाकत अली, जयवीर नेगी, पूरन सिंह, भुवन विद्यार्थी, सुरेश बघरी, भीम बिष्ट, प्रेम लटवाल, नंदन जड़ौत, मनोज सनवाल, गिरीश धवन, ललित लटवाल, पूर्व सांस्कृतिक संयोजक नीरज बिष्ट, कुंवर राज, छात्रसंघ अध्यक्ष अक्षय सुयाल आदि मौजूद थे।