एनसीईआरटी के जगह दूसरी किताबें बेचने की सूचना मिलने पर एसडीएम विवेक राय ने अधिकारियों की टीम के साथ बीयरशिवा स्कूल में छापेमारी करके भारी संख्या में किताबें जब्त की और कमरे में सीज कर दिया गया। छापेमारी के वक्त विद्यालय में काफी संख्या में अभिभावक किताबें लेने पहुंचे थे। एसडीएम ने अभिभावकों को दी गई अन्य प्रकाशकों की किताबों को भी वापस करवा दिया। इसके साथ ही कापी किताबों के लिए प्रिंट रेट से अधिक ली गई धनराशि भी वापस करवा दी।
एसडीएम विवेक राय ने बताया विद्यालय प्रबंधन द्वारा एनसीईआरटी की कुछ गिनी चुनी पुस्तकें दी गई जबकि अधिकांश पुस्तकें अन्य प्रकाशकों की बेची जा रही थी। उन्होंने बताया कि सैकड़ों की संख्या में पुस्तकें जब्त करके सीज कर दी गई हैं। एसडीएम ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन इन किताबों को स्कूल से बाहर ले जाना चाहेगा तभी इन पुस्तकों को वहां से उठाने की अनुमति दी जाएगी।
बाद में एसडीएम ने नगर की कुछ किताब की दुकानों का भी निरीक्षण किया। जहां अधिक दामों में पुस्तकें बिकने की शिकायत नहीं मिली। एसडीएम ने लोगों से एनसीईआरटी की पुस्तकें ही खरीदने को कहा है। छापेमारी में प्रशिक्षु एसडीएम मनीष बिष्ट, तह सीलदार खुशबू पांडे, डीईमओ एचबी चंद, चौकी लइंचार्ज एनटीडी धीरेंद्र पंत आदि थे।
पुन: प्रवेश के लिए वसूले 2.41 लाख रुपये भी वापस करने के आदेश
एसडीएम विवेक राय ने बीयरशिवा स्कूल प्रबंधन द्वारा छात्र-छात्राओं से रि-एडमिशन के तौर पर ली गई 2.41 लाख रुपये की राशि भी वापस करने के आदेश जारी कर दिए। प्रधानाचार्य से लिखवाया गया कि 2017 के सत्र में 11वीं के विज्ञान और कामर्स के 93 छात्रों से 2,600 रुपये की दर से वसूली गई 2,41,800 रुपये और 146 छात्रों से सौ रुपये की दर से ली गई 14,600 रुपये की धनराशि उनके खातों में वापस कर दी जाएगी। इस बारे में एसडीएम और डीईओ को सूचना देने को भी कहा गया है।
बाजार में उपलब्ध नहीं हैं पर्याप्त पुस्तकें
एक तरफ प्रशासन और शिक्षा विभाग अभिभावकों से सिर्फ एनसीईआरटी की पुस्तकें ही खरीदने को कह रहे हैं जबकि दूसरी तरफ बाजार में छठी से लेकर 8वीं कक्षा की पर्याप्त पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इससे विद्यालयों में पढ़ाई शुरू नहीं हो पा रही है। विद्यालय प्रबंधकों का कहना है कि बाजार में पुस्तकें उपलब्ध नहीं होने से बच्चे पुस्तकों के बगैर विद्यालय आ रहे हैं। इससे उन्हें पढ़ाई की जगह दूसरी गतिविधियों में व्यस्त रखना पड़ रहा है।