अल्मोड़ा। गेहूं की फसल में पीला रतुवा रोग और करनाल बंट रोग लगने की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इन रोगों के लक्षण पाए जाने पर विभागीय कार्मिकों को जानकारी देने और दवाइयों का छिड़काव करने के लिए कहा है।
जिले में कुल 79 हजार हेक्टेयर कृषि आच्छादित क्षेत्र है। रबी के सीजन में 44 हजार हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न फसलें बोई गई हैं। इसमें से किसानों ने 40 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई है। कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं की फसल में पीला रतुवा रोग और करनाल बंट रोग लगने की आशंका को देखते हुए किसानों से सतर्क रहने के लिए कहा। सलाह दी है कि गेहूं के खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी करें। करनाल बंट रोग से बचाव के लिए गेहूं में बालियां निकलने वाली अवस्था में सिंचाई न करें।
बताया कि पीला रतुवा रोग के प्रकोप से गेहूं की पत्तियों में पीलापन आ जाता है। मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह ने कहा है कि पीला रतुवा रोग नियंत्रण के लिए फंफूदी नाशक प्रोपिकोनाजोल 25ईसी (टिल्ट 25 ईसी) 0.1 फीसदी या टेबुकोनाजोल 250 ईसी (फोलीकर 250 ईसी) 0.1 फीसदी, या ट्राइडेमीफोन (बेलेटोन 25 डब्ल्यूपी) का 0.1 फीसदी की दर से छिड़काव करना होगा। एक मिली रसायन को एक लीटर पानी में मिलाएं। दो सौ मिली रसायन दो सौ लीटर पानी में मिलाकर घोल बनाएं और एक एकड़ में छिड़काव करें। रसायन का छिड़काव मौसम साफ होने पर करें, देर शाम छिड़काव करने से बचें। जबकि फसल में बालियां निकलने की अवस्था में करनाल बंट रोग लगने पर संवेदनशील क्षेत्रों में प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी 0.1 प्रतिशत का छिड़काव करने से फसल को रोग से बचाया जा सकता है।