किसी समय अल्मोड़ा नगर में सौ से अधिक पानी के नौले थे। समय बदलने के साथ सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक समृद्ध नौलों में से अधिकांश विलुप्ति के कगार पर पहुंच गए हैं। जिन नौलों में अब भी पानी है वह गंदगी की चपेट में हैं। अतिक्रमण और लोगों की उपेक्षा के चलते ही इन धरोहरों का संरक्षण नहीं हो पा रहा है। बाड़ीबगीचा निवासी कमल वर्मा समेत कुछ लोग ऐसे भी हैं जो निस्वार्थ भाव और प्रचार-प्रसार के लालच के बगैर ही नौलों के संरक्षण में जुटे हैं। कमल वर्मा की प्रेरणा और उनकी टीम के सदस्यों की मेहनत से सालों तक गंदगी से पटा नौला फिर से लोगों की प्यास बुझाने लगा है।
बाड़ीबगीचा मोहल्ले में एक ही परिसर में स्थित दो नौले सालों से गंदगी से पट कर करीब-करीब अपना अस्तित्व ही खोने के कगार पर पहुंच चुके थे। पहाड़पानी नैनीताल निवासी कमल वर्मा नगर के नया बाजार जयराम साह गली में स्वर्णकार की दुकान चलाते हैं। कमल वर्मा ने 2009 में बाड़ीबगीचा नौले के निकट जमीन लेकर मकान निर्माण शुरू किया। 2011 में मकान तैयार हुआ, लेकिन मिट्टी और गंदगी से पटे नौले ने उन्हें असहज कर दिया।
उन्होंने लोगों के सहयोग से नौले के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाया। इस काम में सेलाखेला के अलावा मोहल्लावासियों ने 48851 रुपये का आर्थिक सहयोग किया। तीन महीने तक मिट्टी के ढेर उठाने से लेकर गंदगी की सफाई और अन्य सुधारीकरण कार्य में 1.75 लाख रुपये का खर्च आया। शेष 1,26,149 का खर्च कमल वर्मा ने उठाया। अब दोनों नौलों को जाली लगाकर बंद कर दिया है और पानी के लिए दो हैंडपंप लगा दिए गए हैं, ताकि गंदगी पानी को प्रदूषित नहीं करे। मोहल्लेवासियों ने बकायदा जीबी पंत पर्यावरण संस्थान और स्वजल विभाग के मिले किट से पानी की जांच भी करवाई। जांच में पानी पीने योग्य पाया गया। सर्वसम्मति से नौले में नहाने और कपड़े धोने पर प्रतिबंध लगाकर इस पानी को पीने के उपयोग में लाया जा रहा है।