अल्मोड़ा। शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन चितई स्थित प्रसिद्ध ग्वल देवता मंदिर में पशु बलि नहीं होने दी गई। बलि को लाए गए चार बकरे और एक मुर्गे को मंदिर से लौटा दिया गया। इस पर बलि कराने आए श्रद्धालुओं ने मंदिर में सात्विक पूजा- अर्चना की।
गायत्री परिवार के लोगों ने सोमवार को चितई स्थित प्रसिद्ध ग्वल देवता मंदिर में पशुबलि रोकने के लिए जनजागरण अभियान चलाया। गायत्री परिवार के भीम सिंह अधिकारी ने बताया कि धौलादेवी ब्लॉक के माणम निवासी शंकर आर्या, पालीगुणादित्य के नवीन पालीवाल, मनीआगर के धीरज कुमार और जगदीश प्रसाद मंदिर में बलि को बकरे लेकर पहुंचे थे। गायत्री परिवार के लोगों ने उन्हें उच्च न्यायालय के मंदिरों में पशुबलि पर पूर्ण रोक लगाने संबंधी आदेश की जानकारी दी। इसके बाद बलि को आए श्रद्धालु बकरों को वापस ले गए।
उन्होंने बताया कि अभियान के बाद लोगों में जागरूकता बढ़ी है। पशुबलि के लिए लाए जाने वाले बकरों की संख्या में भी कमी आई है। पहले जहां 200 से 250 बकरे रोजाना लाए जाते थे वहीं अब तीन से 10 बकरे ही आ रहे हैं। जिन्हें जनजागरण के बाद वापस लौटाया जा रहा है। बकरे के स्थान पर श्रद्धालु नारियल पूजा कर रहे हैं। जनजागरण अभियान में सरोज भट्ट, डॉ. मीनाक्षी पांडे, डॉ. मंजू बोरा, डॉ. मीनू भट्ट, निर्मला अधिकारी, मुन्नी बिष्ट, धीरज, अर्जुन नेगी आदि शामिल रहे। संवाद