सिर पर लकड़ियों को ढोतीं ग्रामीण महिलाएं।
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महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने के लिए सरकारें आजादी के बाद से लगातार प्रयास करती रही हैं। सरकारी नौकरियों और पंचायतों में आरक्षण लागू कर महिला सशक्तीकरण का प्रयास किया गया है, लेकिन ग्रामीण महिलाओं की स्थिति में आज भी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीण महिलाओं का जीवन आज भी काम के बोझ तले दबा हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं प्रात: से देर रात तक काम में जुटी रहती हैं। पर्वतीय क्षेत्र में घर की देखभाल, मवेशियों के लिए चारे, पानी, घर के लिए लकड़ी का इंतजाम से लेकर कृषि कार्य महिलाओं के ही जिम्मे है। सरकारें बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के लाख दावे करें, लेकिन हकीकत में आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, शिक्षा व्यवस्था तथा रोजगार आदि सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
महिलाओं को समाज में बराबरी का दर्जा देने के लिए सरकारों ने कानून और कल्याणकारी योजनाएं चलाईं। हालांकि महानगरों और शहरों में रहने वाली उच्च शिक्षित महिलाओं ने इसका लाभ उठाया, लेकिन यह भी सच्चाई है कि ग्रामीण महिलाओं की स्थिति में आज भी अपेक्षित सुधार नहीं आया है। लमगड़ा निवासी गृहणी तारा देवी का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में आज भी महिलाओं की स्थिति नहीं सुधरी है। शासन स्तर पर महिलाओं के कल्याण के लिए तमाम योजनाएं चल रही हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।