उत्तराखंड आरटीई फोरम की ओर से जिला पंचायत सभागार में जनसुनवाई हुई। जिसमें मुख्य वक्ता विपिन बिहारी ने कहा कि मानव को संसाधन मानकर रोजगार, शिक्षा नीति बनाने के परिणाम संतोषजनक नहीं रहे।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं बल्कि मनुष्य का सर्वांगीण विकास होना चाहिए। पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी ने कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था में हर साल पाठ्यक्रम बदला जाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकारी, निजी स्कूलों के लिए एक समान पाठ्यक्रम लागू होने चाहिए।
जोशी ने देश में समान शिक्षा प्रणाली लागू करने, निजी स्कूलों की मनमानी रोकने, शिक्षा में नैतिक मूल्यों को शामिल करने पर जोर दिया। डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने शिक्षा के व्यवसायीकरण, सरकारों द्वारा शिक्षा को बाजार के हवाले करने पर चिंता जताई।
जनसुनवाई के संयोजक रघु तिवारी ने शिक्षा अधिकार को लेकर केंद्र, राज्य सरकारों की उदासीनता पर चिंता जताई। जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती मेहरा ने फोरम के प्रयासों को सराहनीय बताया। संचालन नीलिमा भट्ट, पुष्कर सिंह बिष्ट ने किया।
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष प्रो. इला साह, एनसीईआरटी के प्रो. सिराज अनवर, डॉ. अरशद हुसैन ने वक्ताओं द्वारा उठाए गए समस्याओं को सुना। ज्यूरी ने सरकारी स्कूलों की ढांचागत सुविधाओं की दयनीय स्थिति पर चिंता जताई।
जिला पंचायत सदस्य राधा पांडे, जगदीश पांडे, हरीश डसीला, प्रकाश जोशी, दीपा आर्या, किशन डांगी, कमला देवी, उम्मेद सिंह, अनीता आर्या, मोहन सिंह, कमला, जोहार सिंह, चंद्रा, माया पांडे, शिव सिंह, शशि रावत आदि ने विचार रखे।