रानीखेत (अल्मोड़ा)। सरकार के राजस्व की रीढ़ समझी जाने वाली परिवहन सेवाओं पर भी कोराना का बुरा असर पड़ा है। जिले का सबसे बड़े रोडवेज डिपो से वर्तमान में कुल सात वाहनों संचालन हो रहा है। प्रतिदिन तीन से चार लाख रुपये की आय वाला यह रोडवेज डिपो वर्तमान में कुल 35 से 40 हजार रुपये की इनकम में सिमटकर रह गया है। दिल्ली, लखनऊ, देहरादून जैसे बड़े शहरों के लिए अभी भी वाहन संचालित नहीं हो रहे हैं, जिसका सीधा असर डिपो की आय पर पड़ा है। पिथौरागढ़ रूट के लिए शुरू की गई नई बस सेवा भी 15 दिन के बाद ही बंद करनी पड़ी।
परिवहन निगम का रानीखेत रोडवेज डिपो जिले के बड़े डिपो में शुमार है। कभी यहां 50 बसों का बेड़ा था। हालांकि पिछले कुछ सालों से यहां बस बेड़े में निरंतर गिरावट आई है। कोरोनाकाल से पहले तक यहां से 26 वाहनों का संचालन होता था और प्रतिदिन तीन से चार लाख रुपये की आय होती थी, लेकिन कोरोना का असर परिवहन सेवाओं पर भी पड़ा। कोरोना लॉकडाउन में दो माह बसों का संचालन पूरी तरह से ठप रहा। अनलॉक में संचालन को मंजूरी मिली। वर्तमान में सिर्फ उत्तराखंड की सीमा के भीतर ही वाहनों का संचालन हो रहा है। डिपो से सिर्फ सात बसों का ही संचालन हो रहा है। बताया जा रहा है कि लॉकडाउन खुलने के बाद पिथौरागढ़ सहित कुछ पहाड़ी रूटों के लिए बसों का संचालन शुरू हुआ, लेकिन यह प्रयोग भी सफल नहीं हुआ। पिथौरागढ़ की सेवा भी बंद हो गई। इससे स्थानीय रोडवेज की आय भी प्रभावित हुई है। डिपो की आय सिर्फ 35 से 40 हजार रुपये के बीच सिमट गई है।
इन रूटों पर चल रही हैं बसें
रानीखेत-बागेश्वर, रानीखेत-अल्मोड़ा, रानीखेत-कर्णप्रयाग, रानीखेत-गनाई-रामनगर, रानीखेत-हल्द्वानी, रानीखेत-रामनगर, रानीखेत-हल्द्वानी।
तीन तीन माह से नहीं मिल रहा वेतन
रानीखेत। रोडवेज कर्मचारियों के सम्मुख वेतन के भी लाले पड़े हुए हैं। कर्मचारियों को तीन तीन माह से वेतन नहीं मिला है। जिस कारण उनके सम्मुख भारी आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए कई बार निगम को पत्राचार किए गए हैं।
अभी दिल्ली के लिए दो बसों के संचालन के आदेश मिले हैं। कोरोना के बाद डिपो की आय 40 हजार रुपये है। पिथौरागढ़ रूट पर बस संचालित की गई थी, लेकिन 15 दिन तक सवारी नहीं मिली, जिस कारण उसे बंद करना पड़ा। -देशराज अंबेडकर, एआरएम रानीखेत।