गायत्री परिवार के लोगों का शारदीय नवरात्र में चितई स्थित प्रसिद्ध ग्वल देवता मंदिर में पशुबलि के खिलाफ जनजागरण अभियान जारी है। शनिवार को गायत्री परिवार ने चितई मंदिर में बकरों की बलि देने पहुंचे लोगों तथा 15 बकरियों और एक मुर्गे को वापस लौटाया। गायत्री परिवार ने लोगों से सात्विक पूजा करने की अपील की।
शनिवार को पाट्या गांव के मनोज कुमार, विशालकोट (हल्द्वानी) के चंदन सिंह, टकोली (दन्यां) के दीवान सिंह, खोला पनुवानौला के बिहारी राम, फुलाड़ी बसोली (ताकुला) के उमेद राम समेत 15 लोग बकरों की बलि देने चितई स्थित ग्वल देवता मंदिर पहुंचे थे। गायत्री परिजनों ने पशु बलि को आए लोगों को हाईकोर्ट के पशुबलि पर रोक संबंधी आदेशों से अवगत कराया। बलि को पहुंचे लोगों ने पशुबलि के खिलाफ अपने क्षेत्र में जनजागरण करने का संकल्प लिया और बलि को लाए गए बकरों को वापस ले गए।
पाट्या (दन्यां) के मनोज कुमार, महेंद्र बिष्ट, सुजल कुमार, सोनू पटियाल, लोहना (ताकुला) के घनश्याम आर्या, भनोली की जानकी रैक्वाल, चंद्रा रैक्वाल आदि ने पशुबलि नहीं करने के साथ ही अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया। जागरूकता अभियान के दौरान कई लोगों ने गायत्री परिवार को लेप्रोसी मिशन करबला के लिए आटा, चावल, दाल, तेल आदि सामग्री दान दी। टकोली दन्यां के लछम सिंह, विशालकोट के कुंवर सिंह करायत, खोला के बिहारी राम, पूजा देवी ने दान दिया। अभियान चलाने वालों में रीता पांडेय, आयुषी, भूमिका, अरविंद तिवारी, मंजू जोशी, आरएस बिष्ट, एमसी पांडेय, अभिषेक, दिनेश भट्ट, मंजू तिवारी आदि मौजूद थे।