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मैदान की मांग, सड़क पर खेला हॉकी, फुटबाल, कराटे 

Mon, 18 Sep 2017 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो,रानीखेत, अल्मोड़ा
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रानीखेत गांधी चौक सड़क पर खेलों का प्रदर्शन करते खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
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तमाम प्रयासों के बाद भी जब पर्यटन नगरी को खेल मैदान नसीब नहीं हो सका तो नागरिकों ने विरोध का एक अनूठा तरीका अपना लिया है। खेल प्रेमियों ने अब सड़क को ही खेल मैदान बनाकर वहां खेलना शुरू कर दिया है। गांधी चौक चौराहे की सड़क पर रविवार को हॉकी, फुटबाल, कराटे, ताइक्वांडो सहित तमाम खेल खेलकर विरोध जताया। बाद में नगर में जुलूस भी निकाला गया।
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जनजागरण मंच ने समय-समय पर इस तरह के आयोजन कर विरोध जताने का फैसला लिया है। पर्यटन नगरी के लोग वर्षों से खेल मैदान की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन आज तक कोई नेता या मंत्री यह मांग पूरी नहीं कर पाया। युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए सेना के मैदानों पर निर्भर रहना पड़ता है। पूर्व में कई बार मैदान के लिए स्थल चयनित हुए, लेकिन बात नहीं बनी।

वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने खेल स्टेडियम को मंजूरी दी, लेकिन चयनित स्थल पर जंगलात का अड़ंगा लग गया। हालांकि, सोमनाथ मैदान, रजांग्ला, शैतान सिंह, नरसिंह स्टेडियम और एनसीसी मैदान हैं, लेकिन यह सब सेना के पास हैं। खेल प्रेमियों ने अब इस मांग को जोरदार ढंग से उठाने का निर्णय लिया है। लोगों ने जनजागरण मंच बनाया है।
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रविवार को युवा और बुजुर्ग खेल प्रेमियों ने गांधी चौक सड़क पर करीब एक घंटे तक हॉकी, फुटबाल, क्रिकेट, कराटे आदि खेल खेलकर विरोध जताया। इस दौरान यातायात व्यवस्था भी प्रभावित रही। बाद में खेल प्रेमियों ने नगर में जुलूस प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन के इस अनोखे विरोध में विमल सती, अगस्त शाह, भुवन शाह, खजान जोशी, महेश जोशी, उमेश बिष्ट, त्रिभुवन फर्त्याल, कैलाश पांडे, हिमांशु उपाध्याय, नरेश तलरेजा, हेमंत बिष्ट, हेमंत माहरा सहित दर्जनों खेल प्रेमी मौजूद रहे। 

एक मंच पर आए राजनैतिक दलों के लोग 
खेल मैदान को लेकर विरोध-प्रदर्शन की खास बात यह रही कि सभी संगठनों के लोग एक मंच पर खड़े दिखे। वहां मौजूद लोगों का कहना था कि गली-कूचों में खेलकर उन लोगों की प्रतिभा तो नहीं निखर पाई, लेकिन अब युवाओं की प्रतिभा को जाया नहीं होने दिया जाएगा। खेल मैदान बनाकर ही दम लेंगे। 

मैदान के बगैर कैसे संवरेगा बच्चों का भविष्य 
नेता आए दिन युवाओं से खेलों में भविष्य संवारने की बातें करते हैं, लेकिन खेलने के लिए मैदान का अभाव उन्हें नहीं दिखाई देता। युवाओं ने अपने दम पर राजपुर में छोटे से मैदान को किसी तरह खेलने योग्य बनाया है। पूर्व में एनसीसी मैदान को श्रमदान के माध्यम से ठीक कराया गया, लेकिन मैदान के लिए युवा पीढ़ी आज भी धक्के खाने को विवश है।
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