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सीसी मार्गों के निर्माण तक सीमित नहीं रहें जिला पंचायत के प्रतिनिधि: रावत

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शपथ लेती जिला पंचायत अध्यक्ष उमा सिंह बिष्ट साथ में उपाध्यक्ष कांता रावत साथ में मंचासीन पूर्व स? - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। नवनिर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष उमा सिंह बिष्ट के अलावा उपाध्यक्ष कांता रावत और जिले भर से चुनकर आए जिला पंचायत सदस्यों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। जिला पंचायत अध्यक्ष उमा बिष्ट को प्रभारी डीएम मनुज गोयल ने शपथ दिलाई और उसके बाद अध्यक्ष उमा सिंह ने नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष कांता रावत तथा अन्य जिला पंचायत सदस्यों को शपथ दिलायी।
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बाद में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि जिला पंचायत सदस्यों और अन्य पदाधिकारियों को सिर्फ सीसी मार्ग तक सीमित नहीं रहना चाहिए और सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी हासिल करके विकास कार्य करवाने चाहिए। जिला पंचायत अध्यक्ष उमा बिष्ट ने कहा कि वह किसी भेदभाव के बगैर हर क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता देंगी।
जिपं अध्यक्ष उमा सिंह बिष्ट ने कहा कि जिला पंचायत की आय बढ़ाने के लिए भी सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सदन में सभी की भावनाओं को सम्मान दिया जाएगा। इस मौके पर द्वाराहाट के पूर्व विधायक मदन बिष्ट ने जिले के विकास के लिए राजनीति से ऊपर उठकर काम करने पर जोर दिया। कार्यक्रम को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व विधायक अल्मोड़ा मनोज तिवारी, रानीखेत के विधायक करन माहरा, नगरपालिका अध्यक्ष प्रकाश जोशी, धन सिंह रावत ने भी सदन को संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने जिले के विकास के लिए एकजुट होकर कार्य करने पर जोर दिया। संचालन कांग्रेस जिलाध्यक्ष और पूर्व ब्लॉक प्रमुख पीतांबर पांडे ने किया। वहां पर राज्य दुग्ध फेडरेशन के उपाध्यक्ष दीप डांगी, कांग्रेस नगर अध्यक्ष पूरन रौतेला, तारु जोशी, चंदन बिष्ट, किरन डालाकोटी, मोहन पाठक आदि के अलावा एसडीएम मोनिका, डीडीओ केके पंत, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत राजेन्द्र सिंह कठैत आदि मौजूद थे।
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अध्यक्षा ने सभी क्षेत्रों का समान विकास करने का दिया संदेश
अल्मोड़ा। अपने पहले संबोधन में नव निर्वाचित जिला पंचायत अध्यक्ष उमा सिंह बिष्ट ने यह संदेश देने की कोशिश की कि चुनाव हो जाने के बाद अब वह विपक्षी दलों से जुड़े जिला पंचायत सदस्यों के क्षेत्रों को भी विकास के लिए समान अवसर देंगी। कांग्रेस से जुड़े एक जनप्रति निधि के भाषणों पर असहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक कारणों से यदि किसी क्षेत्र की उपेक्षा हुई तो इससे संबंधित क्षेत्र की जनता का नुकसान होगा, जो उचित नहीं है।
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