जाने माने चित्रकार पद्मभूषण जतिन दास ने देश में शिक्षा के गिरते स्तर पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा ज्यादातर लोगों के लिए शिक्षा का उद्देश्य पैसा कमाकर गाड़ी, बंगला खरीदने तक रह गया है।
कई शिक्षित बच्चों को महात्मा गांधी तक के बारे में जानकारी नहीं होती। लोग इतने अधिक प्रोफेशनल हो चुके हैं कि कला, संस्कृति, परंपरा आदि के प्रति उनकी रुचि समाप्त होती जा रही है।
अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में शिक्षा की दशा बिगड़ती जा रही है। शिक्षा की तरफ देश के निर्माताओं का खास ध्यान नहीं है।
शिक्षा का पाठ्यक्रम इस तरह होना चाहिए कि बच्चों को सबसे पहले अपने गांव, शहर, राज्य, देश के बारे में पूरी जानकारी हो। उत्तराखंड में पढ़ने वाले विद्यार्थी को सबसे पहले अपने राज्य के बारे में जानना चाहिए।
आज लोग अत्यधिक कॉमर्शियल हो गए हैं। लोग सिर्फ पैसा कमाने तक सीमित रह गए हैं। यह स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि कला, पेंटिंग के क्षेत्र में भी इसका असर पड़ रहा है।
पहले की तरह लोग इस क्षेत्र में नहीं आ रहे हैं। मोबाइल, टेलीविजन, इंटरनेट देश को बरबाद कर रहे हैं। युवा वर्ग इनका सदुपयोग कम, दुरुपयोग अधिक कर रहे हैं।
पहाड़, पेड़, पानी, हिमालय का सभी को सम्मान करना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को आगे आना चाहिए। पहाड़ में हमारे पूर्वज घर किस तरह बनाते थे, इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। बारिश के पानी को संचित करने के लिए परंपरागत तरीके अपनाए जाने चाहिए।