पाली पछाऊं के ऐतिहासिक हितचिंतक प्रांगण में हुए अतिक्रमण को प्रशासन ने आखिरकार ध्वस्त कर दिया है। जबकि इसी भवन के पास हुए दूसरे अतिक्रमण का मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन की इस कार्रवाई से संघर्ष समिति और स्थानीय नागरिक संतुष्ट दिखे। इस दौरान वहां सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। एसडीएम ने आठ फरवरी को अतिक्रमण ध्वस्त करने का आश्वासन देकर आंदोलन स्थगित कराया था।
मंगलवार की सुबह एसडीएम एपी बाजपेयी के नेतृत्व में चार दर्जन पुलिसकमी और पीएस के जवान द्वाराहाट पहुंचे। इसके बाद जेसीबी मशीन ने अतिक्रमण को ढहाना शुरू कर दिया। हालांकि कहीं से भी विरोध के स्वर नहीं उठे। आंदोलनकारियों और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की पहल का स्वागत किया और कहा कि जब तक हितचिंतक भवन के पास हुए दूसरे अतिक्रमण को नहीं हटाया जाता तब तक स्थानीय नागरिक संघर्ष करते रहेंगे। अतिक्रमण ध्वस्त होते वक्त सैकड़ों लोग जमा हो गए। मालूम हो कि स्थानीय नागरिक सार्वजनिक स्थल से अवैध अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर हितचिंतक बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले 18 जनवरी से आंदोलनरत थे।
आंदोलनकारियों का कहना था कि इस सार्वजनिक स्थल पर 2012 में अतिक्रमण शुरू हुआ और प्रशासन की नाक के नीचे 31 अगस्त 2014 में दूसरे अतिक्रमणकारी ने निर्माण कार्य शुरू कर दिया। बार-बार अतिक्रमण ध्वस्त करने की मांग उठाई गई, लेकिन प्रशासन ने नहीं सुनी। सार्वजनिक स्थल पर बगैर नक्शा पास कराकर निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जिस कारण नगर पंचायत कार्यालय की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे थे। आठ फरवरी को एसडीएम एपी बाजपेयी ने मौके पर जाकर आंदोलनकारियों से वार्ता की, कहा कि एक मामले में अतिक्रमणकारी स्थगन आदेश लाया है। न्यायालय खुलने के बाद ही इस मामले पर विचार होगा। दूसरे अतिक्रमण को 10 फरवरी को हटा दिया जाएगा। इस अवसर पर थानाध्यक्ष अजय शाह, तहसीलदार धनी राम, नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी अशोक कुमार वर्मा, उपराजस्व निरीक्षक आशुतोष लोहनी सहित तमाम लोग मौजूद थे।
प्रशासन की पहल सराहनीय, दूसरा अतिक्रमण भी हटाए
द्वाराहाट। प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का स्थानीय नागरिकों ने स्वागत किया है। मल्ली किरोली निवासी लक्षमण सिंह किरोला का कहना है कि प्रशासन का कदम काबिले तारीफ है, लेकिन जब तक दूसरा अतिक्रमण नहीं हटाया जाता तब तक संघर्ष जारी रहेगा। दैरी निवासी त्रिभुवन त्रिपाठी ने कहा कि ऐतिहासिक स्थल से प्र्रशासन ने देर में ही सही लेकिन अतिक्रमण को ध्वस्त किया है। लेकिन भविष्य में ऐसा न हो सभी को शपथ लेनी चाहिए। दूसरे अतिक्रमण को हटाने की मांग की। खलना निवासी पूर्व प्रधान हरीश जलाल ने इसे संघर्ष समिति, सभी आंदोलनकारियों और स्थानीय नागरिकों की जीत बताया और एसडीएम एपी बाजपेयी की कार्यप्रणाली की सराहना की।
साप्ताहिक बंदी के बावजूद मेले जैसा माहौल
द्वाराहाट। मंगलवार को साप्ताहिक बंदी रहती है, लेकिन लोग सार्वजनिक स्थल पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई देखने के लिए आतुर थे। जेसीबी मशीन द्वारा कार्रवाई शुरू करते ही बाजार में सैकड़ों लोग जमा हो गए। आसपास के घरों की छतों पर भी काफी भीड़ दिखाई दी।
इसी मैदान में लगता ऐतिहासिक स्याल्दे बिखोती मेला
द्वाराहाट। पाली पछाऊं का पारंपरिक स्याल्दे, बिखोती मेला भी हितचिंतक मैदान में लगता है। इस मेले को देखने के लिए दूर दराज के लोग आते हैं। ओड़ा भेटने की रस्म, झोड़ा, चांचरी, भगनौल आदि के माध्यम से युवा पीढ़ी को कुमाऊं की संस्कृति का बोध भी होता है। इस स्थल पर निर्माण कार्य होने के कारण नागरिक आक्रोशित थे, इसी कारण हितचिंतक बचाओ संघर्ष समिति बनी, जिसे स्याल्दे बिखोती मेला समिति, नगर पंचायत और भूतपूर्व पैंशनर और छात्र संघ सहित मेले में शिरकत करने वाले ऑल, नौज्यूला, गरख ने सहयोग किया। 22 दिन तक लगातार आंदोलन के बाद आखिरकार एक अतिक्रमण ध्वस्त हो गया है। जिसके चलते लोग खुश हैं और ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए हर संभव संघर्ष करने का ऐलान भी कर रहे हैं।