रानीखेत क्षेत्र की आबोहवा पर्यटकों के साथ-साथ दुर्लभ पक्षियों को भी भा रही है। बुद्धिमान पक्षी के रूप में जानी जाने वाली नीली लालगोटी मैगपाई तल्ला बधाण (चिलियानौला) क्षेत्र में हाल ही में देखी गई है। इसे नेचर एवं बर्ड फोटोग्राफर भारत जोशी ने अपने कैमरे में कैद किया है। चमकदार नीली व लंबी पूंछ वाली यह चिड़िया मंत्रमुग्ध करती है। इसके यहां दिखने से प्रकृति व पक्षी प्रेमी उत्साहित हैं। इसकी मौजूदगी हिमालयी क्षेत्र की जैव विविधता के संतुलन के लिए अच्छा संकेत है।
मैगपाई सामाजिक पक्षी भी माना जाता है। यह झुंड में रहना पसंद करता है। यह पर्वतीय वनक्षेत्र, नदी किनारों और हरियाली युक्त स्थानों में पाया जाता है। फिलहाल यह पक्षी संकटग्रस्त श्रेणी में नहीं है।
अप्रैल से जुलाई के बीच होता है प्रजननकाल
इसका प्रजननकाल अप्रैल से जुलाई के बीच होता है। यह ऊंचे पेड़ों की शाखाओं पर सूखी पत्तियों और टहनियों से घोंसला बनाती है। मादा 3 से 5 हल्के नीले या सफेद अंडे देती है। नर और मादा दोनों अंडों और बाद में बच्चों की देखभाल करते हैं। संवाद
यह है पहचान
- लंबाई: 65-68 सेंटीमीटर (पूंछ सहित)
- वजन: 120 से 180 ग्राम
- पंखों का रंग: नीला और काला मिश्रित
- चोंच व टांगें: लाल रंग की
- आहार: फल, कीट, अंडे, छोटे जीव-जंतु।
अचानक एक ऊंचे पेड़ पर मैगपाई बैठी दिखी तो अद्भुत अनुभव व सुकून मिला। सूरज की रोशनी में उसकी खूबसूरती बेहद निखर रही थी। यह देखकर प्रतीत हुआ कि हमारे पर्वतीय क्षेत्र की जैव विविधता संरक्षित है। इससे प्रकृति की सुरक्षा करने की प्रेरणा भी मिलती है। -भारत जोशी, नेचर एवं बर्ड फोटोग्राफर
पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरणीय जागरूकता और हरियाली को बढ़ावा देने के प्रयासों के कारण अब रानीखेत में दुर्लभ पक्षी पुनः लौटने लगे हैं। नीली लालगोटी मैगपाई का दिखना इस बात का प्रमाण है कि यहां पारिस्थितिक संतुलन है। - राजेश भट्ट, पक्षी विशेषज्ञ, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, रामनगर