रानीखेत (अल्मोड़ा)। अखिल भारतीय छावनी बोर्ड उपाध्यक्ष, सदस्य एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने दिल्ली में सांसदों और रक्षा संपदा महानिदेशक से मुलाकात की। इस दौरान छावनी अधिनियम में व्यापक संशोधन के लिए छावनी क्षेत्र के सांसदों और कैंट अधिकारियों ने भी संस्तुति दे दी है।
मुलाकात कर लौटे एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव मोहन नेगी ने बताया कि लैंड एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट 1937 में व्यापक संशोधन की जरूरत है। रक्षा क्षेत्रों में कई भूमि बी-4 और कृषि उपयोग के लिए दी गई है, लेकिन इनका भी उपयोग नहीं हो पा रहा है। रक्षा मंत्रालय को भूमि नीति में परिवर्तन कर बी-4 भूमि को क्लास सी में बदलना चाहिए।
जटिल प्रावधानों के चलते छावनी क्षेत्र में रह रहे लोगों को मालिकाना हक नहीं मिला है। बिल्डिंग बायलॉज संशोधित न होने के कारण जर्जर भवनों की मरम्मत नहीं हो पा रही है। जिस कारण नागरिक आशंकित रहते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए एसोसिएशन पिछले कई सालों से छावनी क्षेत्र में रह रहे लोगों की समस्याएं सुलझाने के लिए संघर्ष कर रही है।
इसके तहत देशभर की 62 छावनियों के 50 सांसदों में से अधिकतर सांसदों ने इस मुहिम के समर्थन में रक्षा मंत्री को पत्र भेजे हैं। केंद्रीय कपड़ा राज्यमंत्री अजय टम्टा ने भी समर्थन दिया है। रक्षा संपदा महानिदेशक आरपी सिंह ने भी मांगों को जायज ठहराया।
कहा कि बिल्डिंग बायलॉज संशोधन के लिए छावनियों से सुझाव मांगे गए हैं। शीघ्र ही लीज नीति, म्यूटेशन, भवन निर्माण के लिए नीति बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस दौरान एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजीव गुप्ता, उपाध्यक्ष वीरेंद्र पटेल, महिला उपाध्यक्ष कविता जैन, विनोद मथुरावाला, रमाशंकर गोयल आदि थे।