जिला सैनिक कल्याण, पुनर्वास कार्यालय की ओर से विजय दिवस की 44वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई। छावनी क्षेत्र में स्थित शहीद स्मारक में नाइन कुमाऊं रेजीमेंट ने शहीदों को बिगुल ध्वनि के साथ सलामी दी। वक्ताओं ने कहा कि दिसंबर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश की लड़ाई लड़ी गई थी।
भारतीय फौज ने 14 दिनों के भीषण युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना को पराजित किया। युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों ने अपने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया। इस युद्ध में वीर सैनिकों ने अपने प्राणों की आहूति दी और कई जांबाज वीरता का परिचय देते हुए देश की रक्षा के लिए अपंग भी हो गए।
भारतीय सेना के अदम्य साहस, वीरता के लिए देश में 16 दिसंबर को विजय दिवस के रूप में मनाए जाने का संकल्प लिया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती मेहरा ने 1971 की लड़ाई में वीर शहीदों के बलिदान को याद किया। नाइन कुमाऊं के कमान अधिकारी ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
नाइन कुमाऊं रेजीमेंट ने शहीदों को बिगुल ध्वनि के साथ सलामी दी। साथ ही दो मिनट का मौन रखा गया। वहां जिला सैनिक कल्याण पुनर्वास अधिकारी अवकाश प्राप्त कर्नल आरपी जोशी, ऑनरेरी कैप्टन बीएस नयाल, कैप्टन जेके पंत, पूरन सिंह रौतेला थे।