नेशनल जूनियर बैडमिंटन चैंपियन और हाल ही में बैंकाक में हुई जूनियर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप में कांस्य पदक विजेता अल्मोड़ा के बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन को 2020 में होने वाले ओलंपिक में भारत को पदक दिलाने की संभावना वाले खिलाड़ियों की सूची में रखा गया है।
ओलंपिक में पदक लाने की संभावना वाले भारतीय खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने वाली ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट संस्था ने 2011 में ही लक्ष्य का चयन कर लिया था और तब से वह प्रकाश पादुकोण एकेडमी बंगलूरू में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्हें 2020 में होने वाले ओलंपिक के लिए तैयार किया जा रहा है। किसी भी खेल में ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट में चयनित होने वाले वह उत्तराखंड के अब तक के एकमात्र खिलाड़ी हैं।
लक्ष्य सेन को बैडमिंटन विरासत में मिली है। उनके दादा स्व. सीएल सेन बैडमिंटन के अच्छे खिलाड़ी थे और उन्होंने अल्मोड़ा में बैडमिंटन को आगे बढ़ाने के लिए काफी योगदान दिया। लक्ष्य के पिता डीके सेन भी राष्ट्रीय स्तर के बैडमिंटन कोच हैं। लक्ष्य ने छह साल की उम्र से ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया। जब वह बहुत छोटे थे तभी से अपने खेल से लोगों का ध्यान आकर्षित करने लगे। 11 साल की उम्र में लक्ष्य ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया जिससे देश के जाने माने बैडमिंटन खिलाड़ियों की नजर उन पर गई। 2011 में लक्ष्य का चयन ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट के लिए हो गया। इसमें चयनित होने वाले वह अब तक के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं।
बता दें कि भारत की ओर से ओलंपिक में हिस्सा ले चुके अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों ने करीब आठ साल पहले ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट संस्था गठित की है। इसमें कई उद्योगपति भी शामिल हैं। यह संस्था देश भर से उन युवा खिलाड़ियों का चयन करके प्रशिक्षण देती है जिनमें ओलंपिक में मेडल लाने की क्षमता हो। चयन के बाद उन्हें ओलंपिक में पदक की दावेदारी के साथ कई साल तक ट्रेनिंग दी जाती है। ट्रेनिंग का सारा खर्चा ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट उठाती है।
प्रकाश पादुकोण एकेडमी में अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण और अन्य अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी उन्हें ट्रेनिंग दे रहे हैं।
16 वर्षीय लक्ष्य वर्तमान में बंगलूरू में रहकर ही राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हैं। लक्ष्य 2015 के नेशनल चैंपियन हैं। जून में बैंकाक में हुई जूनियर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप के सिंगल्स में उन्होंने कांस्य पदक जीता। 2015 में पुणे में हुए सुशांत चिपलकट्टी इंटरनेशनल टूर्नामेंट में भी वह सिंगल के चैंपियन रहे। अगले ओलपिंक खेल चार साल बाद होंगे और तब लक्ष्य सेन 20 साल के होंगे। यह माना जा रहा है कि तब तक वह कई अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपना जौहर दिखाकर अच्छा खासा अनुभव भी प्राप्त कर लेंगे। उत्तराखंड बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव बीएस मनकोटी का कहना है कि लक्ष्य की प्रोग्रेस काफी शानदार चल रही है और 2020 में होने वाले ओलंपिक खेलों में वह भारत की ओर से पदक के प्रबल दावेदार होंगे।