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रावण के पुतला दहन पर महाभारत, दशमी नहीं एकादशी को जला

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अल्मोड़ा के नगरपालिका सभागार में बैठक करते प्रशासन और पुतला समिति के लोग। संवाद - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। शहर में रामलीला की जगह पुतला समितियों के बीच महाभारत (विवाद) होने से सांस्कृतिक नगरी के इतिहास में पहली बार विजयदशमी पर रावण का पुतला नहीं जला। पुतला समिति ने पुतला दहन से इनकार कर दिया और स्टेडियम से रावण के पुतले को वापस ले गई। पुतले लाला बाजार में खड़े किए गए। हालांकि बृहस्पतिवार देर शाम लाला बाजार पुतला समिति ने शिखर तिराहे के समीप एसडीएम और प्रकाश चंद्र जोशी की मौजूदगी में रावण के पुतले का दहन कर दिया।
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विजयदशमी पर बुधवार को माल रोड स्थित पालिका शॉपिंग कांप्लेक्स से रावण और उसके परिवार के पुतलों का भव्य जुलूस निकाला गया। पुतलों का जुलूस चौक बाजार के पास पहुंचा तो रावण पुतला समिति लाला बाजार और देवांतक पुतला समिति राजपुर के सदस्यों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते लात घूंसे चल गए और अफरातफरी मच गई। कार्रवाई की मांग को लेकर पुतला समितियों के सदस्यों ने अपने-अपने पुतलों को रास्ते में ही रोक दिया।
जुलूस देखने पहुंचे लोग भी विवाद के चलते वापस जाने लगे। पुलिस, प्रशासन और दशहरा समिति के पदाधिकारियों ने दोनों पक्षों को किसी तरह समझाबुझा कर शांत कराया तब जाकर यहां से पुतलों का जुलूस निकला। पुतलों के स्टेडियम पहुंचने पर देर रात फिर विवाद हो गया। दशहरा समिति ने पुतला समिति से वार्ता की लेकिन बात नहीं बनी। रावण पुतला समिति लाला बाजार के पदाधिकारियों ने दशहरा महोत्सव समिति के कुछ पदाधिकारियों पर उनकी उपेक्षा करने का आरोप लगाया।
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उन्होंने कहा कि चौक बाजार में विवाद के बाद दशहरा समिति के आश्वासन पर वह पुतले को स्टेडियम में ले गए, लेकिन यहां भी उनकी नहीं सुनी गई। उपेक्षा के चलते वह देर रात रावण के पुतले को स्टेडियम से वापस ले आए। समिति ने रावण के पुतले का एक सिर, उसकी मूंछें, उसके बाल आदि को सांकेतिक रूप से जलाया। रावण के पुतले को लाला बाजार में रखा गया है। बुधवार देर रात तक स्टेडियम के मंच पर भी हंगामा होते रहा। बृहस्पतिवार को दिन भर रावण दहन नहीं होने पर चर्चा होती रही और यहां तक की सोशल मीडिया पर इसे लेकर मीम भी बने। इस बचीब लाला बाजार पुतला समिति ने बृहस्पतिवार को देर शाम शिखर तिराहे के समीप नगर पालिका शॉपिंग कांप्लैक्स के पास उप जिलाधिकारी सदर गोपाल सिंह चौहान, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी की मौजूदगी में रावण के पुतले का दहन किया गया। पुतला फूंकने वालों में रावण पुतला समिति लाला बाजार के अध्यक्ष अर्जुन बिष्ट, धनंजय साह, परितोष जोशी, पंकज वर्मा, जगदीश बिष्ट, अतुल वर्मा, नवीन वर्मा, परीक्षित साह, संजय शर्मा इसके अलावा पुतला समिति के सदस्य समेत रामलीला कमेटी के पदाधिकारी आदि मौजूद थे।
रावण परिवार के पुतलों के जुलूस के दौरान दो पुतला समितियों में विवाद हुआ था। दोनों पक्षों में समझौता भी कराया गया था। जुलूस के दौरान अराजकता फैलाने वाली पुतला समितियों पर दशहरा समिति नकेल कसेगी। ऐसी पुतला समितियों को अगले साल के दशहरा महोत्सव के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।
- अजीत सिंह कार्की, अध्यक्ष दशहरा महोत्सव समिति
जुलूस के दौरान हुए विवाद के दौरान दशहरा महोत्सव समिति सभी पदाधिकारियों और पूर्व पदाधिकारियों के साथ जल्द बैठक कर निर्णय लेगी। पुतला समितियों को आपसी सौहार्द की नजीर पेश करनी चाहिए। इस तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पुलिस को भी जुलूस के दौरान अनुशासन बनाने में जोर देना चाहिए।
- मनोज सनवाल, सचिव दशहरा महोत्सव समिति
लाला बाजार में पिछले कई वर्षो से रावण का पुतला बनते आ रहा है। हम लोग भी जुलूस में पुतला लेकर जा रहे थे। दूसरे पुतला समिति के लोग डीजे में हुड़दंग कर रहे थे। उन्हें समझाने का प्रयास किया तो उन्होंने मारपीट शुरू कर दी। दशहरा समिति से इसकी शिकायत की और उनके आश्वासन पर स्टेडियम पहुंचे पर यहां फिर हमारे खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की गई। इसके विरोध में हम पुतले को वापस ले आए। रावण के एक सिर, उसके बाल, मूंछें को जला दिया गया है।
अर्जुन बिष्ट, अध्यक्ष रावण पुतला समिति
ऐसी घटना फिर न हो इसके लिए किया मंथन
अल्मोड़ा। दशहरा महोत्सव समिति, पुतला समिति और प्रशासन की नगर पालिका सभागार में हुई संयुक्त बैठक में बुधवार को रावण परिवार के जुलूस में हुए विवाद के मामले में चर्चा की गई। बैठक में तय हुआ कि प्रसाशन, दशहरा महोत्सव समिति, जन प्रतिनिधियों, पुतला समितियों की जल्द बैठक होगी जिसमें भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अहम निर्णय लिया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि दशहरा महोत्सव अल्मोड़ा की पहचान है। महोत्सव में ऐसी घटनाओं से गलत संदेश जाता है। ऐसी घटनाओं को रोकने पर जोर दिया गया। बैठक में दशहरा महोत्सव समिति के मुख्य संयोजक कैलाश गुरुरानी, सचिव मनोज सनवाल, मनोज वर्मा, दीप लाल साह, यूसूफ तिवारी, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, एसडीएम गोपाल सिंह चौहान, कोतवाल राजेश यादव, अरबन बैंक के पूर्व चेयरमैन आनंद बगड़वाल, दिनेश गोयल, एलके पंत, नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष सुशील साह, अर्जुन बिष्ट, धनंजय साह समेत पुतला समिति के पदाधिकारी आदि मौजूद थे।
‘दशहरा महोत्सव के इतिहास का काला अध्याय है ये साल’
रामलीला से जुड़े वरिष्ठ कलाकार बोले- ऐसी अराजकता को रोकना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी के ऐतिहासिक दशहरा महोत्सव में रावण परिवार के पुतले का दहन नहीं होने से रामलीला मंचन से जुड़े वरिष्ठ कलाकार आहत है। उन्होंने सांस्कृतिक नगरी के मशहूर दशहरा महोत्सव के इतिहास में इसे काला अध्याय करार दिया।
सभी रंगकर्मियों और कलाकारों ने एक सुर में कहा कि अल्मोड़ा शुरू से सामाजिक समरसता के लिए जाना जाता है, लेकिन आज अराजकता इस कदर हावी हो गई है कि सामाजिक समरसता का ताना बाना ही ध्वस्त किया जाने लगा है। आपसी सौहार्द को बिगाड़ने वालों को चिह्नित किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
कर्नाटक खोला की रामलीला में पिछले 28 साल से लगातार रावण का अभिनय करने वाले कांग्रेस नेता बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि दशहरे पर रावण का पुतला न जलने से सनातन धर्म को ठेस पहुंची है। साथ ही रामलीला मंचन से जुड़े विभिन्न कलाकार भी आहत हैं। उन्होंने कहा कि कुमाऊं में अल्मोड़ा से ही रामलीला की शुरूआत हुई थी लेकिन अब दशहरा महोत्सव में पुतलों के जुलूस के दौरान जो अराजकता हुई उससे सांस्कृतिक नगरी की छवि को बट्टा लगा है। रामलीला, दशहरा के आयोजन से पूर्व शराब को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
अल्मोड़ा का दशहरा पूरे देश में मशहूर है। बुधवार रात रावण परिवार के पुतलों के जुलूस में जो अराजकता हुई उससे अल्मोड़ा के दशहरा महोत्सव में एक कलंक लग गया है, जिसकी भरपाई नामुमकिन है।
नवीन बिष्ट, वरिष्ठ रंगकर्मी और कवि
समितियों के बीच हुए विवाद की वजह से पूरे देश में गलत संदेश गया है। विवाद को बैठकर सुलझाना चाहिए। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए पदाधिकारी ध्यान रखें।
- गिरीश धवन, वरिष्ठ रंगकर्मी
दशहरा में हुई अराजकता से सांस्कृतिक नगरी की विरासत की छवि खराब हुई है। पूरे देश में बुराई के प्रतीक रावण को जलाया गया लेकिन अल्मोड़ा में रावण का पुतला ही नहीं जला।
- लता पांडे, वरिष्ठ लोक कलाकार
सांस्कृतिक नगरी के लिए ये घटना शर्मनाक है। दशहरा महोत्सव की छवि को काफी आघात पहुंचा है। बरसों तक ये काला अध्याय मिट नहीं पाएगा। विजयदशमी पर बुराई का अंत करने के बजाए खुद बुराई जैसी चीजें नहीं करनी चाहिए।
डॉ. ललित जोशी योगी, रंग कर्मी

अल्मोड़ा में लाला बाजार समिति की ओर से तैयार रावण का पुतला। संवाद- फोटो : ALMORA

अल्मोड़ा के स्टेडियम में पुतला दहन के दौरान दशहरा महोत्सव के मंच में भिड़ते लोग। संवाद- फोटो : ALMORA

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