बागेश्वर। बागनाथ मंदिर परिसर के एक कमरे में बंद आठवीं से दसवीं शताब्दी की 90 मूर्तियां अगले महीने से संग्रहालय की शोभा बढ़ाएंगी। ग्रामीण निर्माण विभाग ने संग्रहालय की साज-सज्जा का कार्य पूरा कर मूर्तियों को शिफ्ट करना शुरू कर दिया है। राज्य स्थापना दिवस के दिन से श्रद्धालु संग्रहालय में रखी मूर्तियों का दीदार कर सकेंगे।
नगर के बागनाथ मंदिर में संग्रहालय नहीं होने से आठवीं से दसवीं शताब्दी की 90 मूर्तियां बंद कमरे में बंद थी। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु इनका दीदार नहीं कर पाते हैं। इसके लिए जिला प्रशासन ने कवायद शुरू की। मंदिर परिसर में संग्रहालय के लिए बने कक्ष को मूर्तियों के रखने के लिए उसमें साज-सज्जा का कार्य कराया। कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग ने बीते 29 मार्च को संग्रहालय की साज-सज्जा का कार्य शुरू किया गया। संग्रहालय में दुर्लभ मूर्तियों को रखने के लिए पॉलीकार्बेनेट बॉक्सों का निर्माण कराया गया। सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, अग्निसुरक्षा के लिए अग्निशमन उपकरण, रोशनी के लिए लाइट, जानकारी देने के लिए लेजर लेटर कटिंग साइन बोर्ड लगाए गए हैं।
संग्रहालय के फर्श पर लकड़ी की फ्लोरिंग की गई है। और दीवारों पर बागनाथ मंदिर समूह के चित्र उकेरे गए हैं। इन दिनों संग्रहालय की बाहरी सजावट के लिए वहां भगवान शिव की आकर्षक मूर्ति लगाई जा रही है।
इन मूर्तियों के होंगे संग्रहालय में दीदार
संग्रहालय में रखी जाने वाली मूर्तियों और मातृकाओं में आठवीं सदी की उमा-महेश, पार्वती, वैष्णवी और कौमारी मातृकाएं, नवीं सदी की महिषासुर मर्दिनी, हरिहर, उमा-महेश, गणेश, चामुंडा, बाराह, वीणाधारी शिव, त्रिभुजी शिव, ब्रह्माणी, दशावतर पट्ट, पंचदेव पट्ट, माहेश्वरी और दसवीं सदी की भगवान गणेश, शेषयाची विष्णु, सहस्त्र शिवलिंग, चतुर्मुखी शिव, भगवान विष्णु, कार्तिकेय भगवान आदि शामिल हैं।