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...तो गर्मियों में पानी के बगैर दिन गुजारेंगे रानीखेतवासी

Tue, 19 Apr 2016 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
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रानीखेत में पानी का संकट। - फोटो : अमर उजाला
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 बारिश की कमी के चलते पर्यटन नगरी में गर्मियों में पेयजल संकट तय है, आसन्न संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं तक नहीं हैं। मालूम हो कि तापमान बढ़ने के साथ पर्यटन नगरी में पेयजल की समस्या और भी विकट रूप धारण कर लेती है।

नई पेयजल योजनाओं का निर्माण तो दूर आजादी के बाद ताड़ीखेत ब्लाक के 40 ग्राम सभाओं के लिए 1973 में बनी ताड़ीखेत-गगास पेयजल योजना का पुनर्गठन तक नहीं हो सका है। दूसरी तरफ छावनी क्षेत्र की बड़ी आबादी की प्यास बुझाने वाली देवीढुंगा पेयजल योजना भी जीर्ण-शीर्ण पाइप लाइनों के सहारे चल रही है। इसके पुनर्गठन के लिए स्वीकृत 85 लाख रुपये की धनराशि अभी तक नहीं पहुंची है।
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1869 में जब अंग्रेजों ने यहां सैन्य छावनी बसाई तो पेयजल बड़ी समस्या थी। तब चौबटिया कालनू के नागपानी क्षेत्र में छोटे-छोटे पानी के स्रोतों को संग्रहित कर यहां से योजना बनाई गई। वितरण का कार्य एमईएस को सौंपा गया। नागापानी हाईस्ट प्वाइंट से एक वितरण टैंक चौबटिया में और 38 हजार गैलन का एक टैंक रानीखेत के द्यूलीखेत में बनाया गया। आबादी बढ़ी तो 1964-65 में कालू गधेरा डैम का निर्माण हुआ। लेकिन इससे भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो सकी।
1973 में ताड़ीखेत गगास पेयजल योजना बनी। इस योजना से एक हिस्सा सैन्य क्षेत्र के लिए और एक हिस्से से 40 से अधिक ग्राम सभाओं की प्यास बुझती है, सेना की पेयजल लाइन का पुनर्गठन तो हुआ, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बनी लाइन अभी भी पुनर्गठन की बाट जोह रही हैं। इन ग्राम सभाओं में हर तीसरे दिन पानी मुहैया कराया जाता है। गर्मियों में हर साल किल्लत बढ़ जाती है। जबकि रानीखेत नगर के लिए भी अभी तक नई पेयजल योजना नहीं बनी है। वर्तमान में यहां छावनी परिषद पानी मुहैया कराती है। 1997 में बनी इस योजना के पाइप लाइन भी जीर्ण हालत में हैं। नगर के लिए पांच ट्यूबवेलों में से वर्तमान में केवल दो ट्यूववेल चल रहे हैं, जबकि तीन ट्यूबवेलों का कार्य पूरा नहीं हो सका है।

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अभाव में हर तीसरे दिन मिलता है पानी
रानीखेत। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता केएस खाती ने बताया कि ताड़ीखेत ब्लॉक के 40 ग्राम सभाओं की 35 हजार  आबादी के लिए प्रतिदिन 14 लाख लीटर पानी की जरूरत पड़ती है, पानी की कमी के अभाव में वह हर तीसरे दिन पानी बांटते हैं।  छावनी परिषद के वर्क सुपरवाइजर ईश्वर सिंह ने बताया कि छावनी क्षेत्र की 15 हजार आबादी के लिए प्रतिदिन छह सौ किलो लीटर पानी की जरूरत होती है। कमी के चलते अब केवल एक टाइम पानी उपलब्ध कराया जाता है। नगर के लिए दो ट्यूववेल चल रहे हैं, जबकि तीन नए ट्यूबवेलों का कार्य अभी पूरा नहीं हो सका है।

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रानीखेत-भुजान योजना के डीपीआर भी स्वीकृत नहीं
रानीखेत। रानीखेत नगर के लिए रानीखेत-भुजान पेयजल योजना की स्वीकृति का श्रेय तो राजनीतिक दलों के नुमाइंदों ने जमकर लिया, लेकिन यह योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।  जबकि चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल योजना का कार्य भी अभी तक पूरा नहीं हो सका है। जल निगम के अधिशासी अभियंता एके कटारिया ने बताया कि रानीखेत-भुजान पेयजल योजना की डीपीआर जलनिगम मुख्यालय को भेजी गई है। जल निगम यांत्रिकी के सहायक अभियंता आरके शर्मा ने बताया चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल योजना में अब सिर्फ पंप इंस्टालेशन का कार्य होना है। शीघ्र ही यह कार्य भी पूरा हो जाएगा। 
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देवीढुंगा स्रोत पर नहीं बन सका चेक डैम
रानीखेत। छावनी परिषद ने देवीढुंगा पेयजल योजना के स्रोत पर पानी की बर्बादी रोकने के लिए चेक डैम बनाने का भी निर्णय लिया था। लेकिन चेक डैम भी अभी तक बनकर तैयार नहीं हो सका है। छावनी परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नेगी ने बताया कि देवीढुंगा पेयजल योजना के स्रोत में चेक डैम के लिए सीईओ के साथ स्थल का निरीक्षण भी कर लिया गया है। इसके लिए धन का इंतजार है।

 
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