रानीखेत में ट्रामा सेंटर का भवन।
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गोविंद सिंह माहरा राजकीय अस्पताल में करोड़ों की लागत से निर्मित ट्रामा सेंटर का भवन सफेद हाथी साबित हो रहा है। महकमे द्वारा एक दशक पहले अल्मोड़ा में भवन का लोकार्पण तो कर दिया गया, लेकिन इसके लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं जुटा पाया। वर्तमान में यह भवन डॉक्टरों का आवास बनकर रह गया है। गंभीर दुर्घटनाओं के रोगी आज भी सुशीला तिवारी अस्पताल पर ही निर्भर हैं।
उपमंडल क्षेत्र की सर्पीली सड़कों पर वाहन दुर्घटनाओं की आशंका के मद्देनजर रानीखेत उपमंडल के अलावा गैरसैंण, चमोली और बागेश्वर क्षेत्र के लोगों की मांग पर भाजपा की अंतरिम सरकार ने स्थानीय राजकीय अस्पताल में एक करोड़ की लागत से ट्रामा सेंटर स्वीकृत किया। भवन बना और एक दशक पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अल्मोड़ा में इसका लोकार्पण तक कर डाला।
तब से लेकर डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं हो सकी। फिलहाल इस भवन में डॉक्टर रह रहे हैं। व्यापार संघ जिलाध्यक्ष मोहन नेगी ने कहा कि महकमे को पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधारने के प्रयास करने चाहिए। ताकि खामियाजा रोगियों को ना भुगतना पड़े। व्यापार मंडल अध्यक्ष भगवंत नेगी का कहना है कि राजनीतिक दलों के नुमाइंदों ने लोगों को हमेशा गुमराह किया है। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. डीएस नेई ने कहा कि केंद्र में जब तक डॉक्टरों की व्यवस्था नहीं हो जाती तब तक इसके संचालन की कोई उम्मीद नहीं दिख रही।