‘अभियान जिला रानीखेत’ से जुड़े लोगों ने सोशल मीडिया के बाद अब धरातल पर आंदोलन शुरू कर दिया है। कई लोगों ने सोमवार को सुभाष चौक पर जिले के लिए धरना दिया।
कहा कि सीएम रावत को रानीखेतवासियों की भावनाओं से कोई सरोकार नहीं है। वह पुराने जुमलों से जनता को गुमराह कर रहे हैं। तय हुआ कि अभियान के बैनर तले अब हर सोमवार को स्मृति धरना के नाम से सुभाष चौक पर प्रदर्शन होगा। बड़े आंदोलन की भी तैयारी है।
भाजपा सरकार ने 2011 में रानीखेत जिले की घोषणा की थी, लेकिन कांग्रेस सरकार ने इसके लिए समिति बिठा दी। जिले के नाम पर एक बार फिर से जनता ठगी गई। रानीखेत को जिला बनाने के लिए क्षेत्रवासी सालभर से सोशल मीडिया में अभियान चला रहे हैं।
पिछले वर्ष 19 नवंबर को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जिले की मांग पर कुछ दिन इंतजार करने की बात कही थी, इसके बावजूद जिले की घोषणा न होने से जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस अभियान से जुड़े लोगों ने अब हर सोमवार को स्मृति धरना के नाम से सुभाष चौक पर साप्ताहिक धरना शुरू कर दिया है।
अभियान के संयोजक डीएन बडोला ने कहा कि मुख्यमंत्री कभी ‘चित्त है वित्त नहीं’, कभी ‘धीरे-धीरे मना धीरे सब कुछ होय’ जैसे जुमलों से जनता के साथ छल कर रहे हैं। छावनी परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नेगी ने कहा कि अब हर हफ्ते सोमवार के दिन मुख्यमंत्री को जिला निर्माण की याद दिलाने के लिए धरना, अनशन आदि कार्यक्रम किए जाएंगे।
विमल सती ने संचालन किया। सभासद संजय पंत, विनोद कुमार, कामरान कुरैशी, पूर्व सभासद उमेश पाठक, एसएस राना, रोहित नेगी, शिवराज सिंह माहरा, कमलेश बोरा, गोपाल नाथ गोस्वामी, धन सिंह बिष्ट, नीरज भंडारी, पूरन सिंह बिष्ट, हरीश चंद्र, एमसी जोशी, बीएस नेगी, दीप नेगी, डीएस रावत, कुंदन, दिनेश राम, प्रेम सिंह नेगी, नरेंद्र सिंह, बीडी मठपाल, आरपी जोशी, मनोज अग्रवाल आदि थे।