हॉट सीट रानीखेत में चुनाव के अंतिम दौर में मुकाबला काफी रोचक मोड़ पर पहुंच चुका है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट और मुख्यमंत्री हरीश रावत के रिश्तेदार करन महरा दोनों ही प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं निर्दलीय प्रमोद नैनवाल की बढ़ती सक्रियता ने भी दोनों प्रत्याशियों को चिंता में डाल रखा है। अजय भट्ट के समर्थक अब जिस दल की सरकार बने उसी का विधायक बनाओ.. का नारा देकर लोगों को अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा अजय भट्ट को मुख्यमंत्री बनाने के नाम पर तो कांग्रेस हरीश रावत को दोबारा सीएम बनाने के लिए वोट मांग रही है। भाजपा को मोदी फैक्टर पर भी भरोसा है।
रानीखेत विधानसभा क्षेत्र में पिछले दो चुनावों में कांटे की टक्कर रही और दोनों ही बार जीत हार का अंतर काफी कम रहा। 2012 के चुनाव में जहां बसपा प्रत्याशी पूरन सिंह डंगवाल ने जोरशोर से चुनाव लड़कर भाजपा और कांग्रेस दोनों के समीकरण बिगाड़ दिए थे और उन्होंने मुकाबले को लगभग त्रिकोणीय बनाते हुए 9346 मत हासिल किए। उस बार विजयी रहे अजय भट्ट को 14089 और रनर अप रहे करन महरा को 14011 मत प्राप्त हुए। इस बार भाजयुमो प्रदेश उपाध्यक्ष रह चुके निर्दलीय प्रमोद नैनवाल ने दमखम के साथ मैदान में उतरकर दोनों प्रमुख प्रत्याशियों को चिंता में डाल रखा है। प्रमोद नैनवाल की पत्नी हिमानी नैनवाल भिकियासैंण की ब्लॉक प्रमुख भी हैं। प्रमोद नैनवाल युवाओं और महिलाओं को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन उनका असर भिकियासैंण इलाके में अधिक है। भिकियासैंण में उन्हें अधिक मत मिले तो नुकसान कांग्रेस को होगा और यदि नैनवाल भाजपा के वोटों को विभाजित करने में सफल रहे तो वह अजय भट्ट को परेशान करेंगे।
पिछले चुनाव जहां अजय भट्ट पूर्व विधायक के तौर पर चुनाव लड़ा था लेकिन चुनाव जीतने के बाद पांच साल में उनका कद काफी बढ़ चुका है और इस वक्त वह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। अजय भट्ट के समर्थक उनके लिए भावी मुख्यमंत्री के तौर पर वोट मांग रहे हैं। कुछ इलाकों में लोग उनके नहीं पहुंचने से नाराज थे लेकिन हाल के दिनों में उन्होंने गांव-गांव पहुंचकर लोगों की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया है। पिछले चुनाव में बसपा से नौ हजार से अधिक मत प्राप्त करने वाले स्व. पूरन सिंह डंगवाल के दोनों पुत्रों का समर्थन हासिल करके अजय भट्ट ने सिलोर घाटी इलाके में अपनी स्थिति को सुधारने का प्रयास किया है। अजय भट्ट लोगों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं कि बीते तीन चुनावों में राज्य में जिस दल की सरकार बनी, रानीखेत में उस दल का विधायक नहीं चुना गया। भट्ट के समर्थकों ने जिस दल की सरकार बने उसका ही विधायक चुनों का नारा दिया है। भाजपा पूर्व सैनिकों के समर्थन के साथ ही मोदी फैक्टर का फायदा मिलने की भी उम्मीद कर रही है।
दूसरी तरफ पिछले चुनाव में सिर्फ 78 मतों से हारे कांग्रेस प्रत्याशी करन मेहरा सरकार की उपलब्धियां बताते हुए हरीश रावत को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। करन महरा भी अंतिम दिनों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत तीन दिन पहले करन महरा के समर्थन में रानीखेत में जनसभा को संबोधित कर चुके हैं। कांग्रेस अंतिम समय में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। जबकि अजय भट्ट ने आखिरी दो दिनों में केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी और विदेश राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह की सभाएं रखकर माहौल अपने पक्ष में करने का प्रयास किया है। स्मृति ईरानी की भिकियासैंण में हुई रैली में जुटी भीड़ से भी अजय भट्ट खुश दिखाई दिए। वीके सिंह की जनसभा सोमवार को प्रचार के अंतिम दिन रानीखेत में रखी गई है। भट्ट का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की पिथौरागढ़ में हुई रैली का भी सभी सीटों पर असर पड़ेगा। इस बार यहां से बसपा ने जिलाध्यक्ष कृपाल राम को मैदान में उतारा है। बसपा प्रत्याशी भी अपने प्रभाव क्षेत्रों में जोर शोर से प्रचार अभियान चलाए हुए है। निर्दलीय प्रमोद नैनवाल की सेंधमारी के बावजूद मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही होने की उम्मीद है। जानकार मान रहे हैं कि हॉट सीट में इस बार भी मुकाबला कांटे का ही होगा।