नदी और ताल तो जीवन में कई बार देखे, लेकिन पहाड़ की खूबसूरती पहली बार देखी है। प्रख्यात चरित्र अभिनेता वीरेंद्र सक्सेना और चरित्र अभिनेत्री सुहासिनी मूले दोनों पर्यटन नगरी की वादियों से गदगद नजर आए। कहा कि पर्यटन नगरी की सुंदरता का सिर्फ जिक्र सुना था, लेकिन आज आंखों से देख रहे हैं। ब्यूटीफुल लोकेशन। यदि राज्य सरकार ध्यान दे तो रानीखेत की खूबसूरत वादियां फिल्म सिटी के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती हैं।
अमर उजाला से वार्ता में वीरेंद्र सक्सेना ने कहा कि शूटिंग की दृष्टि से वह पहाड़ पहली बार आए हैं। फिल्मों के लिहाज से यहां की लोकेशन काफी खूबसूरत हैं। कहा कि सौहार्दपूर्ण वातावरण में शूटिंग करने का अनुभव ही कुछ अलग होता है। यदि भविष्य में उन्हें रानीखेत में शूटिंग करने का मौका मिला तो वह जरूर यहां पहुंचेंगे। चरित्र अभिनेत्री सुहासिनी मूले ने कहा कि अब तक वह कई धारावाहिकों और फिल्मों में काम कर चुकी हैं।
देश-विदेश में कई लोकेशनों में शूटिंग की, लेकिन रानीखेत की वादियों ने उन्हें सबसे अधिक प्रभावित किया है। उन्होंने बताया कि निदेशक हेमंत वर्मा ने जब उन्हें फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाई तो उन्होंने देखते ही हां कह दी। फिल्म में पहाड़ों में अकेले रहने वाले माता-पिता के दर्द को दिखाए जाने का प्रयास किया है।
‘भला कोई चोर किसी की यादें कैसे चुरा सकता है, वहीं तो मैं कह रही हूं कि कोई चोर ऐसा भी होना चाहिए था, जो लोगों की यादों को चुराने का काम करता हो। जरा सोचो किसी की यादें ही चोरी हो जाएं’।
जी हां कुछ इसी तरह के संवाद हैं यहां होम फार्म में बन रही हिंदी कला फीचर फिल्म पीड़ा के। इस फिल्म के माध्यम से निदेशक हेमंत वर्मा ने पहाड़ में अकेले घरों में रहने वाले मां-बाप के दर्द को पर्दे पर उकेरने का प्रयास किया है। पूरी फिल्म एक कमरे में फिल्माई जानी है, फिल्म में मात्र सुहासिनी मूले और वीरेंद्र सक्सेना दो ही कलाकार हैं।
यहां होम फार्म हेरिटेज में शुक्रवार की सुबह हिंदी फिल्म ‘पीड़ा’ का मुहूर्त शुरू हुआ। सुबह एक कमरे में सुहासिनी चारपाई में लेटी हैं, इसी बीच अंधेरे में एक चोर घुसता है और सुहासिनी की चीख निकल जाती है। इसके बाद शुरू होता है दोनों में संवादों का दौर। निदेशक हेमंत वर्मा ने अकेले रहने वाले माता-पिता की पीड़ा का ताना-बाना इस तरह से बुना है।
निदेशक हेमंत वर्मा ने बताया कि आरएसपीआई और बाबा सिनेमा के बैनर तले यहां 13 दिन तक शूटिंग चलेगी। इससे पहले वह राधास्वामी और संतों पर टेलीफिल्म बना चुके हैं। उन्होंने वृद्धों के लिए ‘एक कोशिश ऐसी भी’ डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जिसे काफी पसंद किया गया था।
निदेशक ने बताया वह वह हरियाणा के रहने वाले थे। उन्होंने 15 साल तक प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी बतौर फिल्म पत्रकार कार्य किया है। फिल्म के निर्माता रमेश प्रयाग हैं। उन्हें होटल स्वामी हिमांशु उपाध्याय आदि भी सहयोग कर रहे हैं।