धौलछीना में आयोजित रामलीला के दौरान रंगारंग कार्यक्रम प्र्रस्तुत करते कलाकार।
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राम राज्याभिषेक और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ धौलछीना में 11 दिवसीय रामलीला महोत्सव का समापन हो गया। देर रात तक चली रामलीला में राजतिलक के बाद रंगारंग सांस्कृतिक संध्या को देखने दूर दराज से बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचे थे। मुख्य अतिथि जिलाधिकारी नितिन सिंह भदोरिया ने रामलीला में अभिनय कर रहे कलाकारों को पुरस्कार भी बांटे।
रामलीला के अंतिम दिन राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान के अयोध्या लौट आने के दृश्य का भव्य मंचन हुआ। राम राज्याभिषेक के बाद प्रसाद वितरण किया गया और इसी के साथ रामलीला का समापन हो गया। मुख्य अतिथि जिलाधिकारी ने रामलीला को भारतीय संस्कृति का अटूट हिस्सा बताते हुए इस प्रकार के आयोजनों में युवाओं से आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने अगले साल अल्मोड़ा महोत्सव के कार्यक्रम धौलछीना में भी आयोजित कराने की बात कही। इससे पूर्व जिलाधिकारी के पहली बार धौलछीना पहुंचने पर रामलीला कमेटी और व्यापार मंडल की ओर से उनका स्वागत किया गया। कमेटी अध्यक्ष खड़क सिंह महरा और व्यवस्थापक दरबान सिंह रावत ने जिलाधिकारी का आभार जताया।
इस मौके पर रंगारंग सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। नव हिमालयन लोक कला केंद्र अल्मोड़ा के कलाकारों ने ओ नंदा-सुनंदा तू दैण है जाए, संध्या झूली रै, अल्मोड़ा बजार हुड़की बाजी रै छम आदि गीतों पर नृत्य किया। लोक गायक दीवान कनवाल ने कस भिड़े कुनई पंडित जी कस करौ छ ब्या गीत गाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। युवा गायिका शैलजा ने मै इजा बाज्यू की लाडली, म्यार दयोरा मोहना, दे दे मेरी झुम्क्याली दाथुली गीतों के माध्यम से शानदार प्रस्तुति दी। विशिष्ट अतिथि खंड शिक्षा अधिकारी हरीश सिंह रौतेला रहे। संचालन डॉ. कैलाश डोलिया और उमेद मनराल ने किया। बृहस्पतिवार को तिलपात्र, हवन और भंडारे का आयोजन किया गया था।