प्रदेश सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति में बने स्मारकों के संरक्षण के प्रति कितनी संजीदा है इस बात का अंदाजा जैंती स्थित प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम सिंह धौनी आश्रम की हालत को देखकर लगाया जा सकता है। राम सिंह धौनी आश्रम के आस-पास बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं। आश्रम भी जीर्ण शीर्ण हालत में है। 25 अगस्त को जैंती में शहीद दिवस समारोह मनाया जाएगा, लेकिन इस आश्रम की सुध लेने की किसी को परवाह नहीं है।
सालम के प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम सिंह धौनी ने सालम पट्टी समेत अल्मोड़ा, नैनीताल, मुंबई, जयपुर, बीकानेर समेत कई बड़े शहरों में 1919 से 1930 तक घूम-घूम कर लोगों में आजादी के प्रति अलख जगाई। सालम पट्टी के बिनौला गांव निवासी राम सिंह धौनी का देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राम सिंह धौनी के निधन के बाद पंडित दुर्गा दत्त शास्त्री, षष्टी दत्त पांडे, इंद्रदेव कांडपाल, डिकर सिंह धानक आदि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने श्री धौनी की स्मृति में 1935 में चौखुरी (जैंती) में आश्रम की स्थापना की थी। स्थापना के बाद से ही यह आश्रम स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र रहा। सालम के क्रांतिकारी इस आश्रम में आजादी की लड़ाई की रणनीति तय करते थे। दूरदराज क्षेत्रों के क्रांतिकारी इस आश्रम में रहकर आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते थे।
25 अगस्त 1942 को सालम में हुई रक्त रंजित क्रांति में इस आश्रम के क्रांतिकारियों का अहम योगदान रहा। क्रांतिकारियों के तेवर देखकर 20 अगस्त को ही अंग्रेज सेना ने धौनी आश्रम को अपने कब्जे में लेकर क्रांतिकारियों का दमन शुरू कर दिया। इसके बावजूद भी क्रांतिकारियों के हौसले कम नहीं हुअ। परिणाम स्वरूप 25 अगस्त 1942 को सालम के क्रांतिकारियों और अंग्रेजी सेना के बीच हुए युद्ध में दुश्मन की गोली लगने से सालम के नर सिंह और टीका सिंह शहीद हो गए। साथ ही सैकड़ों की संख्या में क्रांतिकारी घायल हो गए। क्रांतिकारियों की याद में बना राम सिंह धौनी आश्रम आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। सरकार एक तरफ गांव-गांव में शहीदों के नाम पर स्मारक बनाने की घोषणा कर रही है वहीं अमर क्रांतिकारियों के नाम पर बने स्मारकों के संरक्षण के प्रति सरकार गंभीर नहीं है। सालम के धामद्यो में प्रति वर्ष होने वाले शहीद दिवस समारोह मंच से कई नेताओं ने राम सिंह धौनी आश्रम के संरक्षण की घोषणा की लेकिन बदहाल आश्रम की तस्वीर आज तक नहीं बदल सकी जो सरासर शहीदों का अपमान है।