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क्रांतिकारी राम सिंह धौनी की स्मृति में बना आश्रम बदहाल

Thu, 23 Feb 2017 10:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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बजहाल पड़ा राम सिंह धौनी आश्रम। - फोटो : अमर उजाला
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 सालम पट्टी के महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम सिंह धौनी का देश की आजादी में अहम योगदान रहा है। उन्होंने सालम क्षेत्र में आजादी की अलख जगाई थी। 1919 में प्रथम श्रेणी में स्नातक उत्तीर्ण करने के बाद तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर ने उन्हें तहसीलदार की नौकरी करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया।
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उन्होंने अपना पूरा जीवन देश और समाज सेवा को समर्पित कर दिया। उनकी याद में सालम के जैंती में राम सिंह धौनी आश्रम स्थापित किया गया। देखरेख के अभाव में आज यह आश्रम जीर्ण-शीर्ण हालत में है।  आश्रम की छत टूटने लगी है और दीवारों से पत्थर गिर रहे हैं। आसपास झाड़ियां और घास उग आई है। इससे पूरा आश्रम झाड़ियों में छुप गया है। 

महान क्रांतिकारी और देशभक्त राम सिंह धौनी का जन्म 24 फरवरी 1893 में जैंती तहसील के तल्ला बिनौला गांव में हुआ था। राम सिंह धौनी बचपन से कुशाग्र बुद्धि के थे। वह छात्र जीवन में ही कविता भी लिखने लगे थे। मिडिल परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए इलाहाबाद चले गए। वहां भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।  इलाहाबाद कालेज से स्नातक की डिग्री प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। उस समय श्री धौनी सालम क्षेत्र के प्रथम स्नातक थे। स्नातक की डिग्री के बाद तत्कालीन कुमाऊं कमिश्नर ने उन्हें तहसीलदार की नौकरी करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। धौनी जी में देश प्रेम कूट-कूट कर भरा हुआ था। उनका झुकाव स्वतंत्रता आंदोलन की ओर हुआ और पूरा जीवन देश सेवा में समर्पित कर दिया।
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क्रांतिकारी राम सिंह धौनी की मृत्यु के बाद पंडित दुर्गा दत्त शास्त्री, षष्टी दत्त पांडे, इंद्रदेव कांडपाल, डिकर सिंह धानक आदि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने 1935 में सालम (जैंती) में राम सिंह धौनी आश्रम की स्थापना की थी। स्थापना के बाद से ही यह आश्रम स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख केंद्र भी रहा। महान क्रांतिकारी की याद में बना यह आश्रम आज बदहाली पर आंसू बहा रहा है। आश्रम की छत टूटने लगी है और दीवारों से पत्थर गिर रहे हैं। आसपास झाडिय़ा और घास उग गई है। इससे पूरा आश्रम झाडिय़ों में छुप गया है। उत्तराखंड बनने के बाद तमाम सरकारें आई और गई लेकिन किसी ने भी  इस आश्रम की सुध नहीं ली। 
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