जागेश्वर (अल्मोड़ा)। पहाड़ के गांवों में विकास के दावे जमीनी हकीकत से कितने दूर हैं, इसकी बानगी ग्राम पंचायत धुराटांक के बिबड़ी गांव में साफ दिखाई देती है। संवाद टीम जब गांव पहुंची तो खेतों में फैला सड़क का मलबा, सूखी सिंचाई नहरें और नाराज ग्रामीण सरकार और विभागों से जवाब मांगते नजर आए।
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि लोनिवि की ओर से गैरी गधेरे के ऊपर बनाई जा रही सड़क का मलबा बरसात के दौरान बहकर सीधे गांव के खेतों में पहुंच गया। मोहन चंद्र जोशी, ललित मोहन, शिवदत्त, बसंत बल्लभ और जगदीश चंद्र बताते हैं कि 25 से अधिक सीढ़ीनुमा खेत पूरी तरह मलबे से पट चुके हैं।
ये वही खेत हैं जिन पर कभी गांव की खाद्य सुरक्षा टिकी थी। ग्रामीणों का कहना है कि खेतों में मलबा भरने से न सिर्फ फसल नष्ट हुई, बल्कि उपजाऊ मिट्टी भी बह गई।
बावजूद इसके अब तक किसी भी जिम्मेदार विभाग ने मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन तक नहीं किया। बिबड़ी गांव की यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं बल्कि उन सैकड़ों पहाड़ी बस्तियों की सच्चाई है, जहां सड़क तो पहुंच गई लेकिन खेत, पानी और आजीविका पीछे छूटती जा रही है।