यातायात अव्यवस्था से जूझ रहे लोगों के लिए अब आवारा जानवर भी चुनौती बनने लगे हैं। शनिवार को लावारिस सांड और गाय ने एक व्यापारी को कुचलकर घायल कर दिया। व्यापारी को हल्द्वानी रेफर किया गया है। उनके हाथ, पीठ और पेट में गंभीर चोटें आई हैं। एक साल के भीतर यह जानवर नगर में तीन लोगों को बुरी तरह से घायल कर चुके हैं, लेकिन छावनी परिषद इन पर अंकुश लगाने में पूरी तरह से नाकाम रही है।
शनिवार शाम नगर के कपड़ा व्यवसायी हरचरन जसवाल उर्फ चरन भाई सड़क पर टहल रहे थे। इसी बीच पीछे से आई गाय ने उन्हें टक्कर मारकर सड़क पर गिरा दिया। गाय के पीछे आ रहे सांड ने आकर उन्हें पैरों से कुचल दिया। हरचरन को तत्काल राजकीय अस्पताल भर्ती कराया गया, जहां से उन्हें हल्द्वानी रेफर किया गया है। उनके हाथ में फ्रैक्चर हुआ है। पेट और पीठ में भी गंभीर चोट लगी है।
शहर में आवारा जानवरों के हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते साल 10 जून को भी बाजार में टहल रहे 80 वर्षीय पूर्व सैनिक को सांड ने टक्कर मारकर घायल कर दिया था। फिर 12 अप्रैल को ऐरोड़ क्षेत्र की एक महिला को राजकीय अस्पताल के पास आवारा जानवरों ने मारकर घायल कर दिया था।
वर्तमान में नगर में छोटे-बड़े 50 से अधिक जानवर धड़ल्ले से घूम रहे हैं। कई बार दुपहिया वाहन चालक इन जानवरों से टकरा जाते हैं और गिरकर चोटिल हो जाते हैं। कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष मोहन नेगी ने बताया कि आवारा जानवरों को गौशाला भेजने के लिए कैंट बोर्ड से कई बार आग्रह भी किया जा चुका है।
नगर में घूमने वाले आवारा जानवरों को पहले छावनी परिषद अपने काजी हाउस डाल देती थी और जो लोग इन्हें छुड़ाने आते, उनसे जुर्माना लिया जाता था। यदि कोई जानवरों को छुड़ाने नहीं आता तो जानवरों की नीलामी होती थी, लेकिन अब काजी हाउस में भी जानवर नहीं भेजे जा रहे और न ही किसी अन्यत्र गौशाला में भेजा जा रहा है।
वैसे काजी हाउस में भी जगह की समस्या है। पूर्व में बाजपुर के एक गौशाला में कुछ जानवर भेजे गए थे, लेकिन अब वहां भी जगह नहीं है। वर्तमान में हरिद्वार स्थित एक गौशाला संचालकों से बात हुई है। उनसे जानवरों को छोड़ने का इस्टीमेट मांगा गया है।