अल्मोड़ा। पंचायती वनों से लीसा उत्पादन की बिक्री के बाद वन पंचायत को जो रॉयल्टी दी जाती है, उस रॉयल्टी का इस्तेमाल वनाग्नि रोकने की घटनाओं के लिए किया जा सकता है। इसके लिए वन विभाग वन पंचायतों को ऐसा करने की सलाह देगा, साथ ही इसको लेकर एक पूरा प्रस्ताव वन पंचायतों के सम्मुख रखा जाएगा।
प्रभागीय वन अधिकारी महातिम यादव ने बताया कि अल्मोड़ा वन प्रभाग क्षेत्र में 555 गांवों को लीसा रॉयल्टी के रूप में 2,62,98,876 रुपये का भुगतान किया जाना है। वन पंचायतों के सरपंचों के खाते में यह भुगतान किया जाएगा। बताया कि 26 फरवरी को एनटीडी स्थित वन चेतना केंद्र में एक कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इसमें जिला वन पंचायत की परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष गणेश चंद्र जोशी की उपस्थिति में 108 वन पंचायतों को लीसा रॉयल्टी का करीब 44 लाख रुपया दिया जाएगा।
इस दौरान वन पंचायतों के सरपंचों से वन पंचायत स्तर पर वनाग्नि रोकने के लिए कर्मचारी नियुक्त करने और इस रॉयल्टी का इस्तेेमाल उन्हें मानदेय देने में करने को कहा जाएगा। बताया कि इस क्षेत्र में 70 हजार हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि, 70 हजार हेक्टेयर वन पंचायत क्षेत्र और 40 हजार हेक्टेयर सिविल वन है। यहां ज्यादातर फारेस्ट ऑफिसर 55 साल से ऊपर के हैं और काम के दौरान उनकी उम्र का भी ध्यान रखा जाता है।
कहा कि अल्मोड़ा वन प्रभाग में 2100 वन पंचायत हैं, जिसमें रोजगार की पूरी संभावना है। नियमों के तहत वन पंचायतों को कई अधिकार दिए गए हैं। वन पंचायत और वन पंचायत प्रबंधन समिति को वन पंचायत क्षेत्र में अतिक्रमण, अवैध खनन और वनाग्नि रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में वनाग्नि या वनों से जुड़े अन्य मसलों की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग पर ही नहीं डाली जा सकती है। इसमें अन्य लोगों की भी जिम्मेदारी बनती है, जिसे देखा जाना चाहिए।