अल्मोड़ा। अल्मोड़ा जिले में कोरोना टेस्टों की संख्या को कम कर दिया गया है। लॉकडाउन के दौरान कम किए गए कोरोना जांचों की वजह से मरीज घटे हैं। हालांकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इसे लॉकडाउन की उपलब्धि मान रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि इस लॉकडाउन के दौरान कोरोना जांचों में पॉजिटिविटी रेट बढ़ गया है जो चिंताजनक बात है।
कुमाऊं मंडल में अल्मोड़ा जिला कोरोना की ज्यादा मार झेल रहे जिलों में से एक है। यहां पर राज्य सरकार ने जब लॉकडाउन की घोषणा की उसके बाद अनुमान लगाया जा रहा था कि अब कोरोना पर लगाम लगेगी लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग चाहें भले इस बात को लेकर अपनी पीठ थपथपा रहा हो कि पिछले दिनों कोरोना के मरीजों में कमी आई है लेकिन हकीकत कुछ और ही बयान करती है। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में एक मई से 10 मई तक कोरोना की कुल 14421 जांचें हुई थीं। इस दौरान 2307 मरीज कोरोना संक्रमित मिले। उक्त समय में रोजाना औसतन 1442 जांचें हो रही थीं और कोरोना जांचों में संक्रमण की दर करीब 15.99 प्रतिशत थी। इसके बाद लॉकडाउन लग गया और सख्ती के साथ लोगों की आवाजाही को रोक दिया गया है। 11 मई से 22 मई के दौरान जिले में कुल 13577 जांचें हुईं। अब औसतन प्रतिदिन कि जा रही कोरोना जांचों का औसत 1131 है, जो पहले की अपेक्षा कम है। इन 12 दिनों में 2588 मरीज मिले। इस दौरान 19.06 की दर से कोरोना मरीज मिले हैं। इससे इस बात की ओर इशारा होता है कि कोरोना जांचें कम होने से भले ही जिले में मरीज कम हो गए हैं लेकिन जांचों में संक्रमण दर में कमी नहीं आई है बल्कि यह और बढ़ गया है।
गांवों तक पहुंचा कोरोना बना मुसीबत
अल्मोड़ा। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांवों में कोरोना जांचें कर रहीं हैं। कई गांव ऐसे हैं जहां पर कोरोना जांचों में शत प्रतिशत मरीज मिल रहे हैं। जनपद में अभी तक 23 कंटेनमेंट जोन बनाए गए हैं। ग्रामीण स्तर पर फैला संक्रमण चिंता का विषय बन रहा है। इसलिए लॉकडाउन लगाए जाने की बात भी जिले में कोरोना संक्रमण दर कम होती नहीं दिख रही है।
बीमारी को अब काफी समय हो गया, लेकिन फिर भी कई लोग लापरवाही बरत रहे हैं। संक्रमित होने के बावजूद भी निर्धारित समयावधि से पहले ही आइसोलेशन से बाहर निकलने की भी सूचना मिल रही है। इससे संक्रमण के तेजी से फैलने की आशंका है। वहीं लोग मास्क इस्तेमाल कर ऐसे ही फेंक दे रहे हैं। नियमों का पालन करने से ही संक्रमण से बचा जा सकता है। -डॉ. आरसी पंत, पीएमएस जिला अस्पताल अल्मोड़ा।