अल्मोड़ा। पहाड़ का रसीला फल जंगलों से बाजार तक तो पहुंचा लेकिन अभी यह आम लोगों की पहुंच के बाहर है। आसमान छू रहे काफल के दाम से लोग चाह कर भी अपना पसंदीदा फल नहीं चख पा रहे हैं। चैत में पकने वाले काफल बाजार में 400 रुपये किलो बिक रहा है।
काफल रसीला होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी युक्त है। जिले में धौलछीना, शहरफाटक, जागेश्वर, अंडोली, लमगड़ा क्षेत्र में पाया जाता है। जो यहां के लोगों की आजीविका का भी जरिया है। लमगड़ा से काफल बेचने नगर में पहुंचे दीवान राम ने बताया कि इस बार काफल की फसल ठीक हुई है लेकिन अभी कई जगह फल पूरी तरह पका नहीं है। दूसरे क्षेत्रों से भी काफल बाजार पहुंचेगा तो इसके दाम में भी गिरावट आएगी। संवाद