अल्मोड़ा। वनाग्नि से जंगल को बचाने के लिए शीतलाखेत मॉडल को उत्तराखंड प्रदेश में लागू करने की पहल शुरू हो चुकी है। इसके लिए पौड़ी जिले से 30 सदस्यों का दल शीतलाखेत गांव पहुंचा। दल में सिविल सोयम पौड़ी वन पंचायतों के सरपंच और जनप्रतिनिधि शामिल हैं। ग्रामीणों ने भ्रमण दल का स्वागत किया।
शीतलाखेत पहुंचने पर दल ने ग्रामीणों और वन विभाग के संयुक्त प्रयासों से विकसित एएनआर क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने जाना कि वन क्षेत्र को आग से सुरक्षित रखा जाए तो वहां बिना पौधे रोपे ही जंगल विकसित हो जाता है। भ्रमण दल को वनाग्नि नियंत्रण हेतु निर्मित फायर पट्टियों के बारे में भी जानकारी दी गई। दल ने जंगल बचाओ, जीवन बचाओ अभियान के मुख्य सहयोगी गांवों सूरी और पड़यूला का भ्रमण किया।
इस दौरान गांव में वनाग्नि सुरक्षा गोष्ठी में उन्हें पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से मानव जीवन में जंगल के महत्व, ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन की जानकारी देकर शीतलाखेत मॉडल के बारे में जानकारी दी गई।
वहां महिला मंगल दल अध्यक्ष रेनू परिहार, प्रधान हरक सिंह परिहार, वन क्षेत्राधिकारी मोहन राम आर्या, हीरा सिंह परिहार, सरपंच भूपाल सिंह परिहार, तारा सिंह परिहार, नरेंद्र सिंह बिष्ट आदि मौजूद रहे।