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महिला पालीटेक्निक की हालत बिगड़ी

Wed, 09 Dec 2015 11:42 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, अल्मोड़ा
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 छात्राओं को बेहतर तकनीकी शिक्षा देने के दावे धरातल पर नहीं उतर रहे है। जिले के एकमात्र राजकीय महिला पालीटेक्निक अल्मोड़ा की स्थिति राज्य बनने के बाद खराब हो गई है। प्रधानाचार्य समेत शिक्षकों के 31 पदों में से 17 पद खाली हैं।
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1987 में अल्मोड़ा में महिला पालीटेक्निक की स्थापाना हुई। शुरुआत में किराए के भवन में संस्थान संचालित हुआ। 1998 से पातालदेवी में बने भवन में महिला पालीटेक्निक संस्थान संचालित हो रहा है। वर्तमान में यहां पीजीडीसीए, मॉडर्न आफिस मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस, इंफारमेशन टेक्नॉलॉजी, इलेक्ट्रानिक्स ट्रेड चल रहे हैं।

संस्थान में प्रधानाचार्य समेत कुल 31 शिक्षकों के पद सृजित हैं। प्रधानाचार्य का पद पिछले चार माह से रिक्त है। कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष के पास ही प्रधानाचार्य का कार्यभार है।
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प्रवक्ता रसायन, भौतिकी, गणित, अंग्रेजी, एमओएम, कंप्यूटर एप्लीकेशन के एक-एक पद, व्याख्याता कंप्यूटर साइंस के तीन, आईटी और  कर्मशाला अनुदेशक के तीन-तीन पद रिक्त हैं। हालांकि खाली पड़े 16 पदों में से नौ में संविदा शिक्षक तैनात हैं। बजट के अभाव में संविदा शिक्षकों को मई से वेतन के लाले पड़े हैं।

 पद रिक्त होने से छात्राओं की पढ़ाई पर असर पड़ना स्वाभाविक है। उप्र के समय में संस्थान काफी बेहतर स्थिति में था, पर राज्य बनने के बाद स्थिति खराब हो गई है। प्रभारी प्रधानाचार्य वीके गुप्त ने बताया कि रिक्त पदों की सूचना शासन को भेजी गई है।

पातालदेवी में 106 नाली क्षेत्र में राजकीय महिला पालीटेक्निक स्थापित है। संस्थान परिसर में छात्राओं के तीन हॉस्टल हैं। इनमें 180 छात्राएं रहती हैं, लेकिन चहारदीवारी नहीं बनी है। इससे जंगली जानवरों के साथ ही अराजक तत्वों का खतरा बना रहता है।

आसपास के पालतू पशु और व्यक्ति परिसर में घुस आते हैं और फूल, पेड़ पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। चहारदीवारी नहीं होने से संस्था की भूमि पर भी अतिक्रमण का खतरा बना है। संस्थान को जोड़ने वाली सड़क भी खस्ताहाल है। चहारदीवारी निर्माण के लिए 68.20 लाख का आंगणन बनाकर निदेशक तकनीकी शिक्षा विभाग श्रीनगर गढ़वाल को भेजा है।

बजट के अभाव में संस्थान के कार्मियों के लिए निर्माणाधीन आवासीय भवन पिछले आठ साल से अधूरे पड़े हैं। टाइप-चार के चार, टाइप तीन के चार, टाइप दो के चार आवास निर्माणाधीन हैं। बजट के अभाव में इन भवनों का निर्माण कार्य 2008 से ठप है। कार्य पूरा करने के लिए विभाग ने 88.02 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा है। पर बजट भी नहीं मिला है।

 राजकीय महिला पालीटेक्निक के परिसर में स्थित एक हॉस्टल के समीप चीड़ का विशाल पेड़ झुक गया है। जिससे हॉस्टल को खतरा बना है। आंधी, बर्फबारी होने पर यह पेड़ कभी भी नुकसान पहुंचा सकता है। संस्थान ने वन विभाग को कई बार पत्र भेज दिए हैं, लेकिन खतरा बने इस पेड़ को नहीं काटा जा रहा है।
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