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Almora News: उत्तराखंड बनने के बाद 14 सालों में 950 वन पंचायतों का अस्तित्व हुआ खत्म

Mon, 24 Mar 2025 11:13 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड में वन पंचायतों की स्थिति गंभीर चिंताजनक है। कभी ये पंचायतें ग्रामीणों के लिए न केवल आजीविका का स्रोत थीं बल्कि वन संरक्षण में भी ये अहम भूमिका में थीं। उत्तराखंड में 12,167 वन पंचायतें थीं लेकिन राज्य गठन के बाद इनकी संख्या बढ़ने के बजाय कम हो गई। आलम ये रहा कि बीते 14 सालों में वन पंचायत घटकर 11,217 रह गई हैं।
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सोबन सिंह जीना परिसर के वन एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग की शोधार्थी दीपा बिष्ट ने गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी के सहयोग से शोध किया। शोध में पाया कि प्रशासनिक जटिलताएं, सरकारी नियंत्रण, वित्तीय संकट और वन सीमा विवादों के कारण पंचायतों का अस्तित्व खतरे में है। उन्होंने बताया कि बीते 14 वर्षों 950 वन पंचायतों का अस्तित्व खत्म हुआ है। पहले स्थानीय लोगों को वनों के संरक्षण और उपयोग का स्वतंत्र अधिकार था लेकिन अब प्रत्येक छोटे-बड़े निर्णय के लिए ग्रामीणों को वन विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है जिससे प्रक्रिया जटिल हो चुकी है। इसका असर वन पंचायतों पर पड़ रहा है।
जिलावार वन पंचायतों की स्थित

वन पंचायत 2010 2025
अल्मोड़ा 2324 2089
चमोली 1509 852
चंपावत 654 571
पौड़ी 2450 2165
पिथौरागढ़ 1620 1566

- स्थानीय समुदायों को मिलकर इन पंचायतों को पुनर्जीवित करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। ताकि वनों की सुरक्षा के साथ ही उनकी आजीविका का जरिया भी बन सके।
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दीपा बिष्ट, शोधार्थी, एसएसजे परिसर, अल्मोड़ा।
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