अल्मोड़ा। भारत ज्ञान विज्ञान समिति और बाल साहित्य संस्थान की ओर से आयोजित कविता पाठ कार्यशाला में मुख्य अतिथि वरिष्ठ बाल साहित्यकार डॉ. दिविक रमेश ने कहा कि कविता अंतर्मन की अभिव्यक्ति का माध्यम है। कविता वाचन में हम उतार-चढ़ाव और लय के साथ गाकर कविता को और अधिक रोचक बना सकते हैं।
उन्होंने बच्चों को उच्चारण और प्रस्तुतीकरण के बारे में भी कई टिप्स दिए। तंजिल, तानिया, प्रेरणा, आयुष, दुर्गा, यशपाल, प्रिया, सुवर्णा, आद्या, शिवांशी, देव रक्षिता, प्रांजलि, चित्रांशी, गुंजन, निहारिका, तुलसी, मीनाक्षी, चैतन्य, आदित्य, रश्मि, दीपांशु, रोमा, कोमल, श्वेता, सृष्टि, अर्जरागिनी, नेहा, देव, जयवर्धन, गरिमा, जिज्ञासा, प्रियांशी, सुरेंद्र, चंदन, काव्या, देवांश, आस्था, वान्या, गायत्री समेत 44 बच्चों ने सोहनलाल द्विवेदी, मैथिलीशरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, सुभद्राकुमारी चौहान समेत कई प्रसिद्ध कवियों की रचनाओं का वाचन किया। बाल प्रहरी के संपादक उदय किरौला ने सभी का स्वागत किया। बाल साहित्य संस्थान के उपाध्यक्ष नीरज पंत ने सभी का आभार जताया। इस मौके पर शिक्षाविद आकाश सारस्वत, श्याम पलट पांडेय, उषा सोमानी, मोती प्रसाद साहू, कृपाल सिंह शीला, महेश रौतेला, विमला जोशी, दलीप बोरा, आभा जोशी, नीरज पंत, केशव दत्त जोशी, मीनू जोशी, डॉ. सतीश भट्ट, दीप पांडे आदि थे। इससे पूर्व हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि प्रकाश तातेड़, गोविंद बल्लभ बहुगुणा, डली रानी ब्रह्मा, मेजर डॉ. शक्तिराज कौशिक, मीरा सिंह, कुसुम अग्रवाल, धाराबल्लभ पांडेय, डॉ. राकेश चक्र, नरेंद्र बहुगुणा आदि ने बाल कविताएं पढ़ीं।