रविवार सुबह हुई झमाझम बारिश ने जंगलों की आग से फिलहाल राहत मिल गई है, लेकिन अंधड़ के कारण जंगलों कि गिरे बेतहाशा पिरूल ने वन विभाग की मुसीबत को और बढ़ा दिया है। क्षेत्र के जंगल पिरूल से पट चुके हैं, पिरूल की सफाई के लिए वन विभाग के पास कोई ठोस इंतजाम नहीं हैं। जबकि, फायर सीजन के अभी दो माह और हैं।
लंबे समय से क्षेत्र के जंगल आग की चपेट में थे। अब तक 60 हेक्टेयर से अधिक आरक्षित तथा 20 हेक्टेयर पंचायती वन जल चुके हैं। इनमें कई वनों में जड़ी-बूटी, नव रोपित पौधे जैसी अमूल्य वन संपदा भी राख हो चुकी है। इधर, रविवार की सुबह हुई तेज बारिश से जंगलों की आग बुझने से फौरी तौर पर वन विभाग को राहत तो मिल गई है, लेकिन अंधड़ के चलते वनों में गिरे पिरूल से वन विभाग के माथे पर चिंता की लकीरें और बढ़ गई हैं। जबकि, फायर सीजन के दो माह और शेष हैं।
दो साल पूर्व तक काशीपुर और रुद्रपुर क्षेत्र की कंपनियां पिरूल खरीदने का काम करती थीं और पिरूल से कोयला आदि बनाती थी, लेकिन अब पिरूल उठान का कार्य बंद हो चुका है। वन क्षेत्राधिकारी दीवानी राम ने बताया कि पिरूल उठाने की व्यवस्था नहीं हैं। विभाग की तरफ से गठित सचल दल की टीमें सड़क से लगे जंगलों में गिरे पिरूल को साफ कर नियंत्रित तरीके से नष्ट कर रहे हैं।
बारिश से स्रोतों के रिचार्ज होने की उम्मीद
रविवार सुबह करीब एक घंटे तक हुई झमाझम बारिश के चलते पानी की समस्या से जूझ रहे लोगों के चेहरे खिल उठे हैं। बारिश के चलते तेजी से सूख रहे जल स्रोतों के भी रिचार्ज होने की उम्मीद बढ़ गई है। काश्तकारों के चेहरों पर भी रौनक दिख रही है।