पंतकोटली के जंगल में लगी आग से उठता धुआं।
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जंगलों में बेतहाशा गिर रहे पिरूल ने वन विभाग की नाक में दम कर दिया है। विभाग के आमंत्रण के बावजूद इस साल भी चीड़ के पिरूल को उठाने के लिए कोई भी ठेकेदार नहीं पहुंचा है। अंधड़ के चलते जंगलों में इस बार काफी मात्रा में पिरूल गिरा है। पिरूल उठाने के लिए विभाग के पास पर्याप्त श्रमिक भी नहीं हैं।
वनाग्नि की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माने जाने वाले चीड़ के पीरूल के निस्तारण के लिए वन विभाग ने गत वर्षों में काशीपुर की एक कंपनी को लाइसेंस जारी किया था, कंपनी इस पिरूल से टिकली का कोयला बनाती थी। कंपनी की तरफ से जंगल से पिरूल एकत्रित करने के लिए ग्रामीणों को एक रुपये प्रति किलो के हिसाब से रुपये दिया जाता था, लेकिन इस बार पिरूल के लिए कोई भी ठेकेदार नहीं पहुंचा है। वन विभाग के पास कर्मचारियों का टोटा है, जिस कारण पिरूल का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। वन क्षेत्राधिकारी उमेश पांडे का कहना है कि अधिक मात्रा में पिरूल गिरने से भारी दिक्कतें हो रही हैं। असामाजिक तत्व जंगलों को आग के हवाले कर दे रहे हैं। इधर, पंतकोटली वन पंचायत सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों के जंगलों में आग धधक रही है। धुएं के गुबार से लोगों का जीना मुहाल हो रहा है।