पर्वतीय क्षेत्र के जंगलों में चीड़ की पत्तियां (पिरुल) अब लोगों की आय का जरिया बनेंगी। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान कोसी-कटारमल ने पिरुल की पत्तियों से फाइल कवर, कैरीबैग, लिफाफे, आकर्षक कलाकृतियां, गुलदस्ते तैयार किए हैं। सरकार ने जीबी पंत संस्थान में चल रही नेशनल मिशन आफ हिमालयन स्टीज परियोजना के अंतर्गत मशीनें स्थापित करने के लिए 50 लाख रुपए जारी किए हैं।
संस्थान मशीनें स्थापित करने के बाद ग्रामीण को इसका व्यावसायिक प्रशिक्षण देगा। इससे जहां पिरुल का उपयोग हो सकेगा वहीं ग्रामीण आय भी अर्जित कर सकेंगे।पर्वतीय क्षेत्र में बहुतायत में चीड़ के जंगल हैं। गरमी में चीड़ की पत्तियां जंगलों में आग लगने का प्रमुख कारण हैं।
आग लगने से वन संपदा, जीव-जंतुओं की क्षति के साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। लंबे समय से चीड़ की पत्तियों को उपयोगी बनाने की मांग उठती रही है। जीबी पंत संस्थान के वैज्ञानिकों ने पिरुल से मोटा कागज, गत्ता, फाइल कवर, कैरीबैग, लिफाफे, आकर्षक कलाकृतियां, गुलदस्ते तैयार किए हैं।
संस्थान में चल रही नेशनल मिशन आफ हिमालयन स्टडीज परियोजना के अंतर्गत पिरुल से मोटा कागज, गत्ता, लिफाफे, कलाकृतियां, गुलदस्ते आदि वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण ग्रामीणों को मिलेगा। परियोजना अधिकारी डा. डीएस रावत ने बताया कि केंद्र सरकार से मशीनें स्थापित करने के लिए संस्थान को 50 लाख रुपए पूर्व में मिल चुके हैं। इकाई स्थापित करने को संस्थान के ग्रामीण तकनीकी परिसर में टिनशेड का निर्माण कर लिया गया है। मशीनें क्रय करने के लिए निविदाएं आमंत्रित करने के बाद कोटेशन स्तर पर कार्रवाई प्रगति पर है। जल्द ही संस्थान में मशीनें स्थापित की जाएंगी। इसके बाद ग्रामीणों को प्रशिक्षण देंगे।