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गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंजे पिलखोली के जंगल

Thu, 20 Sep 2018 11:16 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
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रॉक क्लाइंबिंग करते इंडो अमेरिकी सैनिक - फोटो : अमर उजाला
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भारत और अमेरिका की सेना का युद्धाभ्यास जारी है। छावनी और आसपास के घने जंगलों में युद्ध और आपरेशनों जैसा ही वातावरण है। बृहस्पतिवार को संयुक्त सेनाओं ने छिपे आतंकवादियों और विद्रोहियों को पकड़ने के लिए एक बड़े आपरेशन को अंजाम दिया। आपरेशन के लिए यहां पिलखोली के घने जंगल को चुना गया।
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पूरा जंगल उस वक्त गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा, जब भारतीय सैनिकों ने अमेरिकी सैनिकों को जहां क्लिफ चोफ असाल्ट के माध्यम से पहाड़ों में छिपे आतंकियों को मार गिराने का प्रदर्शन किया। स्क्रेमिश आर्डर अटैक से आतंकियों के ठिकाने और बंकर ध्वस्त कर दिए।

 सैनिकों ने दुरूह पहाड़ियों में छिपे आतंकियों और उनके ठिकानों को नष्ट करने के लिए युद्धकला का प्रदर्शन किया। रॉक क्लाइंबिंग के माध्यम से पहाड़ पर चढ़कर वहां छिपे आतंकियों और उनके बंकरों को नष्ट किया गया। बाद में बर्फ के पहाड़ में चढ़ने की कला का प्रदर्शन किया गया। युद्धाभ्यास का नेतृत्व भारतीय सेना के मेजर जनरल कवींद्र सिंह और अमेरिकी मेजर जनरल विलियम ग्राह्म ने किया।
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आतंकियों से छुड़वाया लोगों को
युद्धाभ्यास के आतंकियों द्वारा किडनैप किए गए लोगों को छुड़ाने का भी प्रदर्शन किया गया। आतंकी दो लोगों का अपहरण कर घर के अंदर छिपे थे। दोनों देशों के जांबाजों ने सुनियोजित तरीके से आपरेशन को अंजाम देकर आतंकियों को मार गिराया और लोगों को सुरक्षित छुड़ाया। 

युद्धाभ्यास में 16 आतंकियों को मार गिराया
युद्धाभ्यास के दौरान हुए आपरेशन में पिलखोली के जंगल में सैनिकों ने चुन चुनकर 16 आतंकियों को मार गिराया और उनके बंकरों और ठिकानों को भी नष्ट किया। बाद में रॉक क्लाइंबिंग का अभ्यास अमेरिकी सैनिकों से भी करवाया गया।


पहाड़ पर युद्धकला का प्रदर्शन देख दंग रह गए अमेरिकी सैनिक 
पिलखोली के जंगल में भारतीय सेना ने क्लिफ चोफ असाल्ट और स्क्रेमिश आर्डर अटैक का प्रदर्शन किया। यह तकनीक कारगिल युद्ध के दौरान बेहद कारगर साबित हुई थी। इस तकनीक को देखकर अमेरिकी सैनिक अवाक रह गए। दरअसल, भारतीय सेना को जमीनी युद्ध में महारत हासिल है। दुरूह चट्टानों में छिपे दुश्मनों को मार गिराने में भारतीय सेना का कोई सानी नहीं है।

15 गढ़वाल रेजीमेंट के मेजर बीएस भाकुनी ने बताया कि भारतीय सेना को दुरूह चट्टानों में आपरेशन का गहरा अनुभव है।  उन्होंने बताया क्लिफ चोफ असाल्ट तकनीक से पहाड़ी पर रस्सी के सहारे चढ़कर दुश्मन का खात्मा किया जाता है। अमेरिकी सेना ने भी भारतीय युद्धकला की तारीफ की। मेजर भाकुनी ने बताया कि अमेरिकी सैनिकों को माउंटेन क्राफ्ट की ट्रेनिंग भी कराई जाएगी।

अधिकारी बोले युद्धाभ्यास का अनुभव आएगा काम 
रानीखेत। अमेरिकी मेजर जनरल विलियम ग्राह्म ने कहा कि डिवीजन स्तर पर हो रहे युद्धाभ्यास से दोनों देश काफी कुछ सीखेंगे। भारतीय मेजर जनरल कवींद्र सिंह ने कहा कि दोनों देशों के सामरिक संबंध इस डिवीजन स्तर के युद्धाभ्यास से मजबूत होंगे।  
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