जंगली सुअरों द्वारा बर्बाद किए गए आलू के खेत।
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ग्रामीण क्षेत्रों में वन्य जीवों और लावारिश्स जानवरों के बढ़ते आतंक ने किसानों को खेतीबाड़ी से विमुख कर दिया है। साधनहीन बेबस किसान खेती छोड़ आजीविका के लिए मजदूरी के पेशे को अधिक सुरक्षित मान रहे रहे हैं। द्वाराहाट के खोलियाबांज में जंगली सुअर ने काश्तकारों के आलू के खेत पूरी तरह से तबाह कर दिए हैं।
जंगली जानवरों के आतंक के चलते कभी परंपरागत अनाज और फल, सब्जियों के रूप में सोना उगलने वाले खेत आज बंजर भूमि में तब्दील हो रहे हैं, जंगली सुअर, बारहसिंगे और बंदरों के बाद रही सही कसर लावारिस जानवरों ने पूरी कर दी है। उपमंडल क्षेत्र के अंतर्गत द्वाराहाट, ताड़ीखेत, भतरौंजखान, भिकियासैंण, सल्ट आदि क्षेत्रों में आलू का उत्पादन प्रचुर मात्रा में होता था। अन्य सब्जियां भी उगाई जाती थीं, फलों का भी अच्छा उत्पादन होता था।
द्वाराहाट के खोलियाबांज में आलू की खेती सुअरों ने पूरी तरह से तबाह कर दी है। आलू के खेत खोद दिए गए हैं। काश्तकार प्रहलाद सिंह खाती ने बताया कि आलू उत्पादन से आजीविका चलती थी, लेकिन जंगली सुअरों के आतंक से निजात नहीं मिल पा रही है। आतंक के चलते कई लोग खेती छोड़ रहे हैं। गगास घाटी के काश्तकार राजेंद्र बिष्ट का कहना है कि राज्य बनने के बाद सरकारों ने वोट बटोरने के लिए चकबंदी योजना का शिगूफा छोड़ा, लेकिन चकबंदी योजना आज तक लागू नहीं हो पाई। वन्य जीवों और लावारिस जानवरों से छुटकारा दिलाने की फिक्र किसी भी नुमाइंदे को नहीं है। साल भर मेहनत करने के बाद किसानों के हाथ मायूसी के अलावा कुछ भी नहीं आता।
फोटो: 22 आरकेटी 01पी: द्वाराहाट के रतखाल में इस तरह से सूअरों ने खोदे हैं आलू के खेत।