दीप्ति अंथवाल। फाइल फोटो संवाद
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अल्मोड़ा। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय शीतलाखेत में तैनात फार्मासिस्ट दीप्ति अंथवाल का अचानक स्वास्थ्य खराब हो गया। उपचार के लिए उन्हें शीतलाखेत से रानीखेत ले जाया गया जहां से उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। 108 एंबुलेंस से उपचार के लिए उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही उनकी मौत हो गई।
दीप्ति मूलरूप से ऋषिकेश (गढ़वाल) की रहने वाली थी। सितंबर 2018 में उनकी पहली पोस्टिंग बतौर फार्मासिस्ट राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय शीतलाखेत में हुई। तब से वह इसी अस्पताल में सेवाएं देते आ रही थीं। दीप्ति शीतलाखेत में किराये के कमरे में अकेले रहती थी। शुक्रवार को दीप्ति का स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया। स्वास्थ्य बिगड़ने पर योगा प्रशिक्षक गौरव मनराल और स्टाफ उन्हें उपचार के लिए वाहन से रानीखेत के एक निजी अस्पताल में ले गए। यहां उपचार न होेने पर फिर उन्हें गोविंद सिंह मेहरा राजकीय अस्पताल रानीखेत ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर रेफर कर दिया। 108 एंबुलेंस से उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दीप्ति की मौत की खबर परिजनों को मिली तो घर में कोहराम मच गया। सूचना के बाद परिजन भी शव लेने हल्द्वानी पहुंच गए थे।
काम के प्रति सजग रहती थी दीप्ति
अल्मोड़ा। फार्मासिस्ट दीप्ति अपने काम प्रति हमेशा सजग रहती थी। जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी डॉ. भूपेंद्र सिंह भैसोड़ा ने बताया कि दीप्ति ईमानदार, कर्मठ और कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी थी। ऋषिकेश के रहने वाली फार्मासिस्ट दीप्ति को पहली पोस्टिंग कुमाऊं के राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय शीतलाखेत में मिली। पांच सालों से दीप्ति कुमाऊं में ही काम कर रही थी। उनके निधन पर राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल नगर (अल्मोड़ा) में हुई शोकसभा में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि दी गई। शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना जताई गई। शोक सभा में वीरेंद्र सिंह सुप्याल, दिनेश चंद्र ध्यानी, राहुल सेमवाल, महेश आर्या, रमेश आर्या, गोविंद राम, ओमकार सिंह आदि मौजूद थे।