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प्रशासन के समझाने पर भी नहीं माने पस्तौड़ावार के ग्रामीण

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पस्तौड़ावार में ग्रामीणों के साथ बैठक करते अधिकारी। अमर उजाला - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। सड़क नहीं बनने के विरोध पंचायत चुनाव का बहिष्कार कर रहे पस्तौड़ावार के ग्रामीणों को प्रशासन की टीम नहीं मना पाई। इस पर प्रशासन की टीम को बैरंग लौटना पड़ा। बता दें कि अगर ग्रामीण अपनी मांगों पर अडिग रहे तो पस्तौड़ावार ग्राम पंचायत में प्रधान और बीडीसी सदस्य का पद रिक्त रहेगा।
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पिस्तौड़ावार के ग्रामीण वर्षों से ड्यौड़ाखाल मोटर मार्ग से गांव के लिए सड़क निर्माण की मांग करते आ रहे हैं लेकिन तमाम आंदोलनों और प्रदर्शनों के बावजूद आज तक सड़क निर्माण में कोई प्रगति नहीं हो सकी। इस संबंध में एक शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से भी मिला था, जिसपर सीएम ने कार्रवाई के आश्वासन दिया। ग्रामीणों का कहना है कि सीएम की ओर से भी अभी तक कोई पत्र तक नहीं आया। वहां संघर्ष समिति के अध्यक्ष चंदन सिंह, कुंदन बिष्ट, विरेंद्र सिंह, कुबेर सिंह, अमर सिंह रावत, जसोदा देवी, दुर्गा देवी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
आरोप : सिर्फ गुमराह करता है प्रशासन
मोटर मार्ग के अभाव में ग्रामीण चार से पांच किमी की पैदल दूरी तय कर मुख्य मार्ग तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन प्रशासन के लोग सिर्फ झूठे आश्वासनों के माध्यम से गुमराह कर रहे हैं।
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बिना नेता संघर्ष संभव नहीं
प्रशासन और विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को मोटर मार्ग को लेकर शासन स्तर पर चल रही प्रगति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आचार संहिता के बाद कार्य प्राथमिकता के साथ पूरा होगा, जब ग्रामीणों का प्रतिनिधि ही नहीं होगा तो कैसे संघर्ष किया जाएगा।
कोट : शासन स्तर पर चल रही प्रगति के बारे में बताया गया। ग्रामीणों से कहा कि आचार संहिता के कारण कार्य अटक गए हैं, पंचायत चुनाव के बाद कार्य शुरू होगा, मुख्यमंत्री ने भी इस संबंध में आश्वासन दिया है। हालांकि समझाने का फिलहाल कोई असर नहीं पड़ा है। कल नामांकन का आखिरी दिन है। फिर मनाने की कोशिश होगी। - हेमंत माहरा, नायब तहसीलदार रानीखेत।
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