अल्मोड़ा। एक ओर पेयजल को बचाने के लिए कई जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। दूसरी ओर अल्मोड़ा नगर में हर रोज लाखों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इसके बावजूद पेयजल को बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
बृहस्पतिवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने नगर की सड़कों और रास्तों पर लीकेज के कारण बह रहे पानी को लेकर पड़ताल की। एनसीसी कार्यालय, जोशीखोला, पांडेखोला, तिलकपुर, खोल्टा, एनटीडी सहित कई अन्य स्थानों पर सड़क और रास्तों पर पानी बर्बाद हो रहा है। नगर में वर्तमान में 10500 से अधिक पेयजल उपभोक्ता हैं। इनको 18 एमएलडी पानी की आवश्यकता है। वर्तमान में जल संस्थान को 14 एमएलडी पानी मिल रहा है। लोगों का कहना है कि अगर लीकेज बंद कर दिए जाएं तो .5 एमएलडी पानी को बचाया जा सकता है।
लीकेज लाइनों से घरों में पहुंच रहा है दूषित पानी
अल्मोड़ा। नगर में अधिकांश जगह पाइप लाइनें नालियों में बिछाई गई है जिनमें दूषित पानी बह रहा है। इन जगहों पर लीकेज होने से पाइप लाइनों से दूषित पानी लोगों के घरों में पहुंच रहा है। इससे लोगों में बीमारी फैलने का डर सता रहा है। इसके बावजूद व्यवस्था में सुधार के प्रयास नहीं हो रहे हैं। संवाद
गांवों में भी जल संकट का सामना कर रहे ग्रामीण
अल्मोड़ा। नगर के अलावा गांवों में लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। घनेली, कुटगोली, दुलागांव, रैलाकोट सहित कई गांवों में लंबे समय से पेयजल संकट गहराया है। ग्रामीण ठंड के मौसम में भी पेयजल के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगाने को मजबूर हैं। संवाद
पेयजल लीकेज की सूचना मिलने पर उसे तुरंत ठीक किया जा रहा है। लोगों को मांग के अनुसार पेयजल मिले, इसके लिए नियमित आपूर्ति की जा रही है।
विरेंद्र मेहता, एई जल संस्थान अल्मोड़ा।