रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत महाविद्यालय में बीसीए और एमबीए जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू न होने के कारण स्थानीय छात्र-छात्राओं को शैक्षिक असुविधा हो रही है। उन्हें मजबूरी में बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है। उच्च शिक्षा के इन प्रमुख कोर्सों की अनुपलब्धता से युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है।
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे खासतौर पर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। देहरादून या हल्द्वानी जाकर पढ़ाई करना हर किसी के लिए संभव नहीं है लेकिन वर्तमान में यही एकमात्र विकल्प बन गया है। शिक्षा की इस कमी के चलते पढ़ाई में रुकावट आ रही है। स्थानीय स्तर पर युवाओं का कौशल विकास और आत्मनिर्भरता का सपना भी अधूरा रह जाता है।
महाविद्यालय रानीखेत में बीबीए की पढ़ाई होती तो मुझे देहरादून नहीं जाना पड़ता। घर पर रहकर पढ़ाई करने से खर्च भी बचता और माता-पिता को भी चिंता नहीं होती। हमारे जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए ये बहुत बड़ी राहत मिलती।
शुभ पाठक, छात्र बीबीए, देहरादून पलायन।
बीसीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स अगर रानीखेत में शुरू हो जाएं तो न केवल हमारे जैसे छात्रों को बड़ा फायदा मिलेगा, बल्कि कई प्रतिभाशाली युवाओं का पलायन भी रुकेगा।
देवेश चंद्र, देहरादून पलायन
हम रोज सुनते हैं कि तकनीकी शिक्षा से ही नौकरी मिलती है, लेकिन जब हमारे ही कॉलेज में बीसीए जैसा कोर्स नहीं है, तो हम कहां जाएं। हर किसी के पास बाहर जाकर पढ़ने का पैसा नहीं होता
राहुल बिष्ट, छात्र ।
हम वर्षों से मांग कर रहे हैं कि महाविद्यालय में रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू हों, लेकिन बात कहीं दब-कर रह जाती है। इसका सीधा मतलब है कि प्रशासन और विश्वविद्यालय ध्यान नहीं दे रहे।
मनोज नेगी, छात्र संघ उपाध्यक्ष।
जब तक महाविद्यालय में बीसीए/बीबीए जैसे कोर्स नहीं होंगे, तब तक हमारा संघर्ष अधूरा रहेगा। कई प्रतिभाएं यहां से बाहर चली जाती हैं। यह सिर्फ पढ़ाई का मसला नहीं, बल्कि रानीखेत से पलायन की समस्या है।
रितिका आर्या, छात्रा उपाध्यक्ष।
रानीखेत सहित अन्य महाविद्यालयों में रोजगारपरक पाठ्यक्रम खोलने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। कुछ महाविद्यालयों में पाठ्यक्रम शुरू भी कर दिए गए हैं।
प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट।