अल्मोड़ा मेडिकल काॅलेज के अधीन बेस अस्पताल में 123 स्वास्थ्य कर्मियों के कार्य बहिष्कार से व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। सफाई से लेकर मरीजों को उपचार तक मिलना मुश्किल हो गया है। मरीजों के साथ तीमारदार और चिकित्सक परेशान हैं। स्वास्थ्य कर्मियों ने प्रदर्शन करते हुए कहा कि जब तक पद स्वीकृत नहीं होते और उन्हें वेतन नहीं मिलता वे काम पर नहीं लौटेंगे।
मंगलवार को पीआरडी, उपनल और आउटसोर्स से वार्ड ब्वाॅय, वार्ड आया, पर्यावरण मित्र और सुरक्षा गार्ड के पद पर तैनात 123 कर्मियों ने दूसरे दिन भी कार्य बहिष्कार किया। उन्होंने बेस अस्पताल परिसर में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि कोरोनाकाल से लेकर अब तक उन्होंने अपनी दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी से निर्वहन किया। मेडिकल कॉलेज और बेस अस्पताल में पद सृजित न होने से उन्हें अब तक स्थायी तैनाती नहीं मिल सकी है। कॉलेज प्रबंधन ने भी स्थायी तैनाती होने तक वेतन देने से हाथ पीछे खींच लिए। चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती वे काम पर नहीं लौटेंगे।
स्वास्थ्य कर्मियों के कार्य बहिष्कार से मरीज और तीमारदार दिक्कत उठा रहे हैं। मरीजों को ओटी तक ले जाने और वापस वार्ड तक लाने का काम तीमारदारों को करना पड़ रहा है। मरीजों की देखरेख के साथ उन्हें इलाज देने वाला कोई नहीं है। यदि स्वास्थ्य कर्मी जल्द काम पर नहीं लौटे तो मरीजों और तीमारदारों के साथ ही कॉलेज प्रबंधन की दिक्कत और बढ़ेगी। वहां पर सूरज, मोहित, सतीश, गिरीश, नीरज, भूपेंद्र आर्या, महेंद्र कनवाल, सूरज आर्या, अंकित टम्टा, विद्या देवी, नीरजा देवी, रीता देवी, हेमा, दया, प्राची सहित कई स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।
अस्पताल परिसर में लगा कूड़े का ढेर
पर्यावरण मित्रों के कार्य बहिष्कार से बेस अस्पताल में सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। दो दिन से अस्पताल परिसर की सफाई न होने से जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा है। जगह-जगह बिखरे कूड़े से यहां भर्ती और इलाज के लिए पहुंचे मरीजों में संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।
निश्चित तौर पर स्वास्थ्य कर्मियों के कार्य बहिष्कार से व्यवस्थाएं चरमराने लगी हैं। पद सृजन की कार्यवाही गतिमान है। वेतन के भुगतान के लिए पत्राचार किया गया है।
-प्रो. सीपी भैंसोड़ा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा।