अल्मोड़ा। जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चलाए जा रहे अभियान के बाद भी गर्भवतियों में खून की कमी दूर नहीं हो पा रही है। बीते चार साल में 12 हजार गर्भवतियों की जांच में 303 एनीमिया से ग्रसित मिलीं।
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक गर्भवतियों में खून की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद उन्हें आयरन सहित पुष्टाहार भी दिया जाता है। इसके बाद भी उनमें खून की कमी दूर नहीं हो पा रही है। आंकड़ों के मुताबिक बीते चार साल में स्वास्थ्य विभाग ने 12 हजार से अधिक गर्भवतियों की खून की जांच की। 303 गर्भवतियां एनीमिया से ग्रसित मिलीं। उपचार के बाद सभी गर्भवतियों में खून की कमी को दूर किया गया।
गर्भवतियों में खून की कमी से बच्चों में कुपोषण का खतरा
अल्मोड़ा। चिकित्सकों के मुताबिक गर्भवतियों में खून की कमी से कुपोषित बच्चों के जन्म लेने की संभावना बढ़ जाती है। जिले में लगातार गर्भवतियों के एनीमिया से ग्रसित मिलने पर बच्चे भी कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बीते चार सालों में 90 कुपोषित नवजात चिह्नित किए गए। उन्हें कुपोषण से उबारा गया।
पौष्टिक आहार की कमी बना रही है एनीमिया का शिकार
अल्मोड़ा। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक आम तौर पर ग्रामीण गर्भवतियों में पौष्टिक आहार की कमी उन्हें एनीमिया का शिकार बना रही है। उनके खान-पान का ध्यान नहीं रखा जा रहा है इसके चलते उनमें खून की कमी आ रही है।
यह है एनीमिया
-शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अन्य पोषक तत्वों के साथ आयरन की भी आवश्यकता होती है, जो शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है। यह कोशिकाएं शरीर में हीमोग्लोबिन का निर्माण करती हैं। आयरन की कमी से जहां शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है, वहीं आक्सीजन की कमी होने लगती है। ऐसे में शरीर में कमजोरी और थकान महसूस होती है, जो एनीमिया के लक्षण हैं।
चार साल में एनीमिया से ग्रसित गर्भवतियां
वर्ष गर्भवतियां
2020 115
2021 63
2022 52
2023 73
एनीमिया से बचने के लिए गर्भवतियों को आयरन, फोलिक एसिड दिया जाता है। आशा और एएनएम लगातार गर्भवतियों के स्वास्थ्य की निगरानी करती हैं।
डॉ. आरसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा।
गर्भवतियों को एनीमिया से बचने के लिए पौष्टिक आहार लेना जरूरी है। इसी बीमारी को ठीक होने में कम से कम छह माह का समय लगता है। आयरन, कैल्शियम की दवा लेने के साथ समय-समय पर जांच करना जरूरी है।
डॉ. हेमलता रावत, महिला रोग विशेषज्ञ, महिला अस्पताल, अल्मोड़ा।